मंगलवार, 15 सितंबर 2020

हिमालय दिवस में सम्मानित किए गए विश्वविद्यालय के शिक्षक व सामाजिक कार्यकर्त्ता...

संवाददाता : देहरादून उत्तराखंड 


      9 सितंबर 2020 को हिमालय दिवस के उपलक्ष में पर्वतीय महिला एवं युवा विकास समिति, उफरेंखाल, डालियों का दगड़िया DKD, श्रीनगर, भूगोल विभाग, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय और शहीद भगतसिंह सां. महाविद्यालय द्वारा राजकीय महाविद्यालय उफरेंखाल में संगोष्ठी का  आयोजन किया गया।


इस अवसर पर राजकीय महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ रेनू रानी बंसल को छात्रों, सामाजिक संस्थाओं व नागरिकों को हिमालय के पर्यावरण के प्रति सजग और जागरूक बनाने के प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया।


संगोष्ठी में भाग लेने आए छात्रों,  शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं व उफरेंखाल के नागरिकों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि प्रो. मोहन सिंह पंवार ने हिमालय के महत्व और इसके पर्यावरणीय पक्षों पर नागरिकों की जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालय वैश्विक धरोहर है और इसकी देख रेख यहां के नागरिकों का ही दायित्व है।



दिल्ली विश्वविद्यालय के भगत सिंह सांध्य महाविद्यालय के भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ सुरेश कुमार बंदूनी को हिमालय क्षेत्र में आजीविका और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रयासों के लिए हिमालय सम्मान दिया गया। डॉ. बंदूनी ने भी कहा कि हिमालय अपने अंदर अपने नागरिकों व अपने बाहर के नागरिकों के लिए अपार संभावना का भंडार है। सही नीति और उसके क्रियान्वयन से ही हिमालय के विकास के मार्ग प्रशस्त हो सकेंगे।



इस अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद सदस्य व भूगोल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ वीरेंद्र सिंह नेगी को भी उनके हिमालय शोध व प्रबंधन कार्यों के लिए योगदान हेतु हिमालय कर्मी सम्मान दिया गया।


गोष्ठी में हिमालय के पर्यावरण को सुरक्षित और यहां के निवासियों की आजीविका के लिए जैविक व पर्यावरणीय दृष्टि से सक्षम उपायों को प्राथमिकता देने की प्रतिज्ञा ली गई। 



डालियों के दगड़िया के आशाराम मंमगई को विशेष सम्मान देते हुए नागरिक व समाज जीवन में उनके कार्यों को सराहा गया।


पर्वतीय महिला एवं युवा विकास समिति डंडखील गांव, उफरेंखाल के निवासी महिमानंद धौंडियाल ने इस क्षेत्र में पर्यावरण व आजीविका को नये आयाम देने की पहल की बहुत प्रसंशा की गई और उन्हें भी हिमालय मित्र सम्मान से पुरस्कृत किया गया।


क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय पशु चिकित्सक डॉ उपाध्याय ने स्थानीय लोगों में विज्ञान व शोध से निकली जानकारी को अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यहां की जलवायु व प्रजातियों का संरक्षण व संवर्धन लोगों कि आय को कई गुना बढ़ा सकता है।