सोमवार, 1 जून 2020

जिम्मेदार लोगों का कोरोना...

संवाददाता : देहरादून उत्तराखंड 


       पूरी दुनिया कोरोना के संक्रमण से जूझ रही है और देवभूमि उत्तराखण्ड भी अचानक आई कोरोना रूपी बाढ़ में बहने लगा है। देश में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, खासकर दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात आदि राज्यों में तो हालात बदतर हो चुके हैं, लोग त्राहिमाम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बचाने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा है।


उत्तराखण्ड में शुरूआती दिनों में हालात नियंत्रण में रहे और कुछ मरीजों के बाद स्थित सामान्य होने लगी थी कि तभी देश में केन्द्र सरकार ने तालाबन्दी में कुछ ढ़ील दे दी और प्रवासियों को अपने-अपने राज्यों में जाने की छूट दे दी। इस छूट का लाभ उठाकर पूरे भारत से उत्तराखण्ड निवासी अपने घरों की ओर दौड़ पड़े। मुम्बई, दिल्ली, नोएडा, सूरत आदि शहरों से उत्तराखण्ड आए लोगों ने एक दम से कोरोना विस्फोट कर दिया और एक-एक दिन में 200 से अधिक मामले दर्ज किये गये।


आंकड़ा तीन से चार दिनों में ही चार अंकों में जा पहुंचा। सरकार के हाथ-पांव फूल गये। पहले ही सरकारी मशीनरी सुस्त गति से चल रही थी लेकिन कोरोना का विस्फोट होते ही मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्री और अधिकारी हरकत में आ गए। एकान्तवास का पालन करने वालों पर सख्ती की गई और कई जगह टकराव के हालात भी बने, लेकिन इसी बीच सरकार के भारी भरम मंत्री की लापरवाही से देहरादून में कोरोना का जो महाविस्फोट हुआ, उससे पूरी सरकार ही कोरोन्टाईन में जाने को मजबूर हो गई।



पर्यटन व सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज के घर से करीब 22 लोगों को कोरोना पाजिटिव पाये जाने से पूरी सरकार सकते में आ गई है। विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि महाराज के परिवार से तीन लोग दिल्ली गये और वापिस आए। जब यह लोग वापिस आए तो कोरोना वारियर्स की पहली कड़ी के रूप में कार्य कर रही आशा, एएनएम के द्वारा उनके घर में कोरेन्टाईन के पोस्टर चस्पा किये गये। लेकिन यह पोस्टर आम आदमी के घरों में ही काम करते हैं, खुद सरकार चलाने वालों पर इसका शायद कोई असर नहीं होता है, इसलिए ही इन कोरेन्टाईन पोस्टरों की कोई परवाह नहीं की गई और दिल्ली से कोरोना लेकर आया परिवार देहरादून से लेकर पौडी तक सेवा करने में व्यस्त बना रहा।


इतना ही नहीं वरन इस बीच महाराज जी केबिनेट की बैठक में भी भाग लेने चले गये।यदि यहीं पर कोई सामान्य आदमी ऐसा करता तो उस पर आपराधिक मामला दर्ज होता, लेकिन इसमें सरकार के ही भारी-भरकम मंत्री और उनके परिवार के लोग शामिल हैं इसलिए कोई हलचल ऐसी नहीं दिखी, बल्कि उन्हें ही सेवा का मसीहा बनाकर शहीद किया जाने लगा। जब समझदार कहे जाने वाले लोगों के यह हाल है तो आम उत्तराखण्डी क्या करेगा? सवाल उनसे अवश्य पूछा जाना चाहिए जो कल तक जमातियों के नाम पर हो हल्ला कर रहे थे कि जमातियों ने कोरोना फैला दिया है, अब उनकी आवाज क्यों सुनाई नहीं दे रही है।


महाराज के कितने ही भक्तों को और कर्मचारियों को कोरोना का संक्रमण लगा है इसकी अभी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन यह आंकड़ा चौकाने वाला हो सकता है। क्योंकि महाराज जी ने इस बीच जितनी भी फाईलें की होंगी और वह फाईलें कौन-कौन कर्मचारी लेकर इधर-उधर गये होंगे। उन फाईलों पर किन-किन अधिकारियों ने हस्ताक्षर किये होंगे। इस लिहाज से तो पूरा सचिवालय और आधा विधानसभा संदेह के घेरे में आ खड़ा हुआ है।


यही नहीं सेवा कार्य करने के लिए इस बीच महाराज जी कहां-कहां गये और किन-किन लोगों से मिले होंगे, वह सभी लोग अब संदेह में आ चुके हैं। इस तरह से एक व्यक्ति की लापरवाही से पूरा राज्य ही कोरोना के संकट में घिर गया है। महामारी के कानून के मुताबिक अब इन पर कार्यवाही होनी ही चाहिए। जिम्मेदार लोगों पर और कठोर कार्यवाही होनी चाहिए, अन्यथा इनकी देखा-देखी समाज भी लापरवाही करेगा और असामान्य होते हालात और भी बुरे होते जायेंगे। महाराज जी के परिवार की कुशलक्षेम के साथ पूरे राज्य की कुशलता की कामना करनी होगी।


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