मंगलवार, 2 जून 2020

रसायन और पेट्रोरसायन की सार्वजनिक खरीद को अनिवार्य बनाया गया,मेक इन इंडिया को प्राथमिकता : मनसुख मांडविया

संवाददाता : नई दिल्ली


       उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने आय और रोजगार बढ़ाने के इरादे से मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करने और भारत में वस्तुओं के विनिर्माण और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक खरीद (मेक इन इंडिया को प्राथमिकता) 2017 के आदेश को 29 मई 2019 में संशोधित किया है।


रसायन और पेट्रोरसायन विभाग ने घरेलू रसायन और पेट्रोरसायन उद्योग की मौजूदा क्षमता और स्थानीय प्रतिस्पर्धा की सीमाओं के आकलन के आधार पर स्थानीय सामग्री का न्यूतनम स्तर और उनकी गणना के तरीके तय करते हुए सार्वजनिक खरीद वाले पेट्रोरसायनों की पहचान की है। इस क्रम में 55 विभिन्न प्रकार के रसायनों, पेट्रोरसायनों , कीटनाशकों और डाइस्टफ की पहचान की गई है। इन रसायनों और पेट्रोरसायनों के लिए न्यूनतम स्थानीय सामग्री की अनिवार्यता वर्ष 2020-2021 के लिए 60 प्रतिशत, 2021-2023  के लिए 70 प्रतिशत और 2023 -2025 के लिए 80 प्रतिशत निर्धारित की गई है।



विभाग द्वारा चिन्हित किए गए 55 प्रकार के रसायनों और पेट्रोरसायनों में से 27 के लिए स्थानीय आपूर्तिकर्ता पांच लाख रूपए से अधिक और 50 लाख रूपए से कम के अनुमानित मूल्य की बोली लगाने के पात्र होंगे।  शेष 28 रसायन और पेट्रोरसायनों के संबंध में, खरीद करने वाली संस्थाएं बोली लगाए जाने की व्यवस्था होने के बावजूद स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से ही इनकी खरीद करेंगी क्योंकि ऐसी सामग्रियों के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धा मौजूद है।



यह कदम प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किए गए आत्मनिर्भर भारत अभियान को सशक्त बनाएगा और “मेक इन इंडिया” के तहत घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा देगा।


केन्द्रीय रसायन और उर्वरक तथा जहाजरानी राज्य मंत्री मनसुख मांडविया ने इस फैसले की सराहना करते हुए कहा , "रसायनों और पेट्रोरसायनों की सार्वजनिक खरीद को अनिवार्य बनाये जाने से वस्तुओं के विनिमार्ण और उत्पादन तथा सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और ये मिलकर मेक इन इंडिया को प्रोत्साहित करेंगे।‘’


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