गुरुवार, 4 जून 2020

विश्व पर्यावरण दिवस पर "डालियों का दगदिया" के सचिव मोहन सिंह पवार के विचार...

प्रजा दत्त डबराल @ देहरादून उत्तराखंड 


      विकासशील देश होने के नाते भारत की अर्थव्यवस्था और समाज पर यहां की  पर्यावरणीय परिस्थितियों का प्रभाव पड़ा है। सारा विश्व इस समय कोराना महामारी से जूझ रहा है पर्यावरण संकट की आहट से चौंकने  का वक्त अब बीत चुका है।यह करीब करीब सिद्ध हो चुका है कि विश्व में अधिकांश बीमारियां वन्य जीव वाइरस से मानव जाति में फैली है। कोरोना भी चमगादड़ से ही मानव में स्थानांतरित हुआ है।


संस्था के सचिव मोहन सिंह पवार प्रोफेसर श्रीनगर यूनिवर्सिटी उत्तराखंड ने हमारे संवाददाताओं को बताया की हमेशा से कुछ मुट्ठी भर लोगों की मनमानी का खामियाजा आज सारा विश्व भुगत रहा है।यह स्पष्ट हो चुका है कि यदि जैव विविधता का अधाधुंध विदोहन जारी रहा तो प्रकृति के न्याय की बर्बरता का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाएगा। यही कारण है कि प्रकृति ने मानव को घरों में कैद करके रख दिया और अपने आप को पुनर्स्थापित करने का पर्याप्त समय ले लिया।



इस कोराना महामारी में पर्यावरण पर अनेक सकारात्मक प्रभाव भी नजर आए जैसे वायु प्रदूषण सामुद्रिक प्रदूषण वैश्विक तपन में भारी कमी आती है ,नासा की रिपोर्ट बताती है कि सारे विश्व में कार्बन उत्सर्जन में 32 प्रतिशत तक की कमी आयी है।नदियों का पानी स्वच्छ हुआ और 50 मीटर से भी नदी में मछली तैरती नजर आ रही है। सड़कों पर वन्य जीवों को बेखौफ घूमते देखा जा सकता है क्योंकि मानव ने उनके आवास क्षेत्र में जबरदस्त अतिक्रमण किया है। वनस्पतियों का जीवन चक्र पहले से अधिक संतुलित हुआ है। इसका प्रभाव है कि कॉरोना के अतिरिक्त अन्य बीमारियां भी कम हुई हैं।


लेकिन कब तक ? 
आज विश्व पर्यावरण दिवस पर हमें गंभीरता से विचार करना है की प्रकृति ने जैसे एक झटके में मानव गतिविधियों  पर रोक लगा दी, इससे स्पष्ट है कि प्रकृति के विनाश पर खड़ी की जाने वाली सुख सुविधाएं व आरामदेह जीवन शैली के लोभ से उपजी इस समस्या के दुष्प्रभाव कमोबेश सभी देशों सरकारों और समुदायों पर आशातीत हैं। आओ हम सब मिल कर पर्यावरण सर्णकचन  के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी को गंभीरता और संजीदगी से निभाएं।


संस्था के आशा राम ममगाईं ,फील्ड को-ऑर्डिनेटर से भी हमारे संवाददाता की बात हुई उन्होंने बताया की कल विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में वृक्षा रोपण कार्यक्रम ग्राम कथूली टिहरी गढ़वाल अयोजित होना है। यहां पर सदियों से एक पानी का धारा है जो सदियों से गांव को पेयजल आपूर्ति करता है अब धीरे -धीरे उसमे पानी कम हो रहा है उस धारे को बचाने की मुहिम है। उसके कचमैंट में वृक्ष लगाने है। डालियों का दगड़िया 05 जून को पर्यावरण दिवस पर यह कार्य करेगी।


आपको बता दें डालियों का दगड़िया,जो जन कल्याण और धर्मार्थ उद्देश्य के लिए कार्य करती है,संस्था का 1991 में पंजीकरण हुआ,जिसका मुख्यालय आम्रकुंज लेन नंबर 2,श्रीनगर (गढ़वाल) -346174 उत्तराखंड में है। 


लेबल: