गुरुवार, 30 जुलाई 2020

दिल्ली पुलिस हुई दागदार ,रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़े गए थाना विजय विहार के थानाध्यक्ष एस.एस.चहल...

संवाददाता : नई दिल्ली


      सीबीआई ने रिश्वतखोरी के आरोप में 18 जून 2020 बुधवार को दिल्ली के विजय विहार पुलिस स्टेशन में छापा मारकर एसएचओ सहित दो सिपाहियों को गिरफ्तार किया। सीबीआई के एक आलाधिकारी ने बताया कि एंटी करप्शन यूनिट ने रिश्वत के मामले में रोहिणी जिला के विजय विहार थाना के एसएचओ एस.एस.चहल और उनके दो सिपाहियों - बद्री और जितेन्द्र को गिरफ्तार किया है। उन्हें 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा।


इस बाबत पर सीबीआई ने जानकारी देते हुए बताया था कि हमें पक्की सूचना मिली कि थाना विजय विहार के एचएसओ किसी मामले में मोटी रिश्वत लेने वाले हैं तो हमने इस पर एक टीम गठित कर जाल बिछाकर धरपकड़ के लिए मौके पर पहुंचे।  हालांकि,दिल्ली पुलिस ने सिर्फ एक सिपाही की गिरफ्तारी की बात कही है।



आपको बता दें कि एक शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क किया और अपनी शिकायत उनको बतायी की विजय विहार थाने के एसएचओ ने उनके प्लॉट पर निर्माण की अनुमति देने के लिए उनसे 5 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। जिसकी शिकायत शिकायतकर्ता ने सीबीआई से की। इसके बाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) यूनिट ने आरोपियों को पकड़ने के लिए टीम गठित कर एक जाल बिछाया और 18 जून को शिकायतकर्ता को 2 लाख रुपये के साथ एसएचओ के पास भेजा गया। जब सीबीआई ने छापा मारा तो एसएचओ एस.एस.चहल ने भागने की कोशिश की जिसको सीबीआई वालों ने तुरंत धर दबोचा।


एक बार तो उनकी जमानत खारिज हो गई और दुबारा अपील करने के बाद आजकल वह 50000 निजी मुचलके पर जमानत पर बाहर हैं।



आपको बता दें निलंबित एसएचओ एस.एस चहल जो द्वारका की एक सोसाइटी में रहते हैं, उनके घर व उनकी सोसाइटी की पार्किंग से गाड़ियों का भी काफी बड़ा जखीरा बरामद हुआ। जांच में यह भी पता चला है कि उनके पास द्वारका, डीएलएफ, ओखला, हरियाणा और पालम गाव में संपत्तियों के कागजात मिले हैं।जिसकी जांच अभी सीबीआई द्वारा चल रही है और आपको बता दें कि उनकी पर्सनल गाड़ी में भारत सरकार का भी स्टीकर लगा मिला। 



विश्वसनीय सूत्रों से पता चला है कि जैसा कि सभी को मालूम है,द्वारका में 95 फीसदी कोपरेटिव हाउसिगं सोसायटी है और उन्हीं सोसाइटी में से एक सोसाइटी में निलंबित एसएचओ एस.एस.चेहल रहते हैं ,उस सोसायटी में निलंबित थानाध्यक्ष ने उत्पात मचा रखा है। इनसे सोसायटी के ज्यादातर लोग परेशान थे। सन 2013 में सुरेन्द्र चेहल ने यहां फ्लैट खरीदा और यहां रहने आ गये। समझ लो उस दिन से इस सोसाइटी के बुरे दिन शुरू हो गए,जिस समय घर खरीदा उस समय वह सब इन्सपैक्टर थे, आते ही अपना पुलिसिया रोब दिखाना शुरू कर दिया। सबसे पहले जनाब ने लाईट के मीटर का कनेक्शन डायरेक्ट कर लिया, जब सोसायटी मैनेजमेंट को पता चला तो, माफी मांग कर अपना पल्ला झाड़ लिया। धीरे-धीरे इनकी तानाशाही बढ़ती गयी और ये लोगों का सिरदर्द बनते गये। अपनी बढ़ती गाड़ियों की संख्या जिसमें लगभग 9 गाड़िया हो चुकी थीं, दूसरों की रिर्जव पार्किंग में खड़ी कर रौबदारी दिखाने लगे।


बीते समय के अनुरूप इनकी दबंगई बढ़ती गयी, इनकी दबंगई और बदतमीजी इतनी बढ़ गयी की गुस्से में औरतों को भी गाली दे दिया करते थे।  इनकी खिलाफ 100 नंबर पर पीसीआर कॉलें होने लगी और धीरे-धीरे 2013 से अभी तक दर्जन से भी ज्यादा पुलिस शिकायतें इनके खिलाफ दर्ज करवाई जा चुकी थीं। धीरे-धीरे सोसाइटी के अकाउंट में कुछ फंड ट्रांसफर कर हेराफेरी भी करने लगे, उसी का केस न्यायालय में आज भी विचाराधीन है।सोसायटी के चुनाव में शाम-दाम-दण्ड-भेद कर सुचिव की पोस्ट को हथिया ली , फिर तो सोसायटी के लोगों का जीना और भी दूभर कर दिया। यदि कानून के रखवाले ही इस बाबत पुलिस के अधिकारों का फायदा उठायेंगे तो आम आदमी कैसे कानून पर विश्वास करेगा। इनके खिलाफ सोसायटी के लोगों ने दिल्ली कमिश्नर पुलिस सहित भारत के गृहमंत्री को भी शिकायत भेज दी। ताकि इनकी बढ़ती दादागिरी से सोसायटी के आम लोगों को निजात मिल सके।



बिंदापुर और प्रशांत विहार पोस्टिंग के दौरान किसी मामले में उनकी उच्च स्तरीय जांच करायी गयी जिसमें कई जगह उन्हें संदिग्ध पाया गया, साथ ही 2014/2016 के दौरान विदेशी टूरों की डिटेल्स भी हाथ लगी जिसमें पता लगा कि थाना प्रभारी विदेशों का भी दौरा भी समय-समय पर किया करते थे।  अब देखना यह होगा कि निलंबित एसएचओ चहल अपनी ताकत के बल पर गवाह को डराने और धमकाने में कामयाब होते हैं या फिर न्याय प्रणाली सच को सामने रख फैसला करेगी ताकि भविष्य में दिल्ली पुलिस की शाख को फिर कोई एस.एस.चहल रिश्वत लेकर दागदार ना कर सके।


 


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