रविवार, 23 अगस्त 2020

गढ़वाली गीतिकाव्य "चैतै चैत्वाली" का ऑनलाइन लोकार्पण...

प्रजा दत्त डबराल @ नई दिल्ली


      वरिष्ठ आंचलिक साहित्यकार  जगमोहन सिंह रावत कि गढ़वळि गीतिकाव्य "चैतै चैत्वळि" को ऑनलाइन लोकार्पण किया गया। इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के साहित्य जगत से जुड़े मुख्य अतिथि पार्थसारथी थपलियाल, मदन डुकलान, डॉ. प्रीतम अपछ्यांण, आशीष सुन्दरियाल रहे।


कार्यक्रम का कुशल संचालन जाने-माने पत्रकार व गढ़वाली संस्कृति के प्रतीक दिनेश ध्यानी जी ने प्रभावशाली ढंग से किया। उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच (दिल्ली) के सहयोग से ऑनलाइन इस कार्यक्रम में पुस्तक का संपादन अनूप रावत व प्रस्तुतकर्ता/प्रकाशक: रावत डिजिटल (बुक पब्लिशिंग हाउस) की मेहनत व प्रयास सराहनीय है।



पूर्णता गढ़वाली भाषा में आयोजित इस कार्यक्रम में जगमोहन सिंह रावत के गढ़वाली जन सामान्य व जीवन के सूक्ष्म से सूक्ष्म व महत्वपूर्ण बिंदुओं को साहित्य में पिरोने की सफल कोशिश को बहुत सराहा गया। दिनेश ध्यानी जी ने बताया कि मां सरस्वती के आशीर्वाद से उत्तराखंड समाज को आने वाले समय में संस्कृति के संरक्षकों की एक नई पौध तैयार मिलेगी।


दिल्ली विश्वविद्यालय में उत्तराखंड से आने वाले डॉ. वी एस नेगी ने बताया कि कोरोना लॉकडाउन काल में दिनेश ध्यानी निरंतर गढ़वाल से जुड़ी प्रतिभाओं को समाज व देश के समक्ष ला रहे हैं। इस अवसर पर जगमोहन सिंह रावत जी ने उत्तराखंड के समस्त विद्वत व साहित्य समाज का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में उत्तराखंड की संस्कृति को लिपि बंद करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए अन्य लोगों को भी साहित्य में योगदान देने का आग्रह किया।



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