रविवार, 16 अगस्त 2020

नए एसएमसी सदस्यों से मिले मनीष सिसोदिया, आऊट आॅफ द बाॅक्स सोचने की सलाह दी...

संवाददाता : नई दिल्ली


      दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार कई स्कूलों में नवगठित स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने एसएमसी को स्कूलों की कैबिनेट बताते हुए खुद फैसले करने और संसाधन जुटाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि स्कूलों के संचालन में आपकी भूमिका अभिभावक जैसी हो। श्री सिसोदिया ने एसएमसी को शिक्षा विकास की नई कहानी लिखने का आह्वान करते हुए कहा कि हम सपने देखें और उन्हें पूरा करने की जिम्मेवारी भी लें।

 

सिसोदिया ने रविवार पटपड़गंज क्षेत्र में मंडावली स्थित आरएसकेवी नंबर एक तथा पश्चिम विनोद नगर स्थित आरएसबीवी में नवगठित एसएमसी से संवाद किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 98 फीसदी रिजल्ट आने में एसएमसी का बड़ा योगदान है। वर्ष 2015 में जब मैं स्कूलों में जाता था, तो प्रिंसिपल बताते थे कि हर काम के लिए सरकार पर निर्भर होना पड़ता है। किसी विषय के शिक्षक की कमी हो या स्कूल परिसर की घास कटवानी हो, हर चीज की फाइल डिप्टी डायरेक्टर के पास घूमती रहती थी। लेकिन हमने ऐसे सभी फैसलों का अधिकार प्रिंसिपल को दे दिया।

 


 

सिसोदिया ने कहा कि हर स्कूल एक अलग सरकार है जिसके मुखिया प्रिंसिपल हैं और एमएमसी उनकी कैबिनेट है। आप स्वयं संसाधन जुटाएं, और स्कूल का विकास करें। सरकार से मिले संसाधन के अलावा समाज से भी योगदान लेकर स्कूल का विकास करें। सिसोदिया ने कहा कि हमारी यही कोशिश है कि स्कूल का पूरा दायित्व खुद एसएमसी संभाले। राज्य सरकार की भूमिका सिर्फ भवन और संसाधन देने की हो।

 

सिसोदिया ने कहा दिल्ली के स्कूलों के संचालन में एसएमसी सदस्यों ने मिले योगदान की चर्चा करते हुए विभिन्न उदाहरण भी बताए। उन्होंने कहा कि कई स्कूलों में बच्चों के पेयजल के लिए एसएमसी सदस्यों ने जनसहयोग से आरओ सिस्टम लगवा दिया। किसी स्कूल में किसी विषय के शिक्षक की कमी होने पर कुछ समय के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी। एक स्कूल में इकोनोमिक्स के शिक्षक नहीं थे तो एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर की कुछ दिनों तक क्लास लगवा दी। 

 

सिसोदिया ने एसएससी सदस्यों को आऊट आॅट द बाॅक्स सोचने की सलाह देते हुए कहा कि आप कुछ हटकर नया सोचने की आदत डालें। अगर आपके स्कूल के चार बच्चे कमजोर हों, तो किसी गाय-भैंस पालने वाले से कहकर उन बच्चों को दूध का इंतजाम कराने की सोचें। अगर मोबाइल की कमी के कारण दस बच्चों की आॅनलाइन शिक्षा बाधित हो, तो जनसहयोग से उनका इंतजाम करने की सोचें। श्री सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा तो ऐसी चीज है, जिसके लिए बड़े-बड़े लोग भी दान मांगते हैं और मिलता भी है। आप खुद के लिए कुछ मांगेंगे तो नहीं मिलेगा, लेकिन बच्चों की शिक्षा के लिए हाथ फैलाएंगे तो समाज की भरपूर मदद मिलेगी।

 


 

सिसोदिया ने कहा कि एसएमसी सदस्यों को स्कूल के अभिभावक और सहयोगी की भूमिका निभानी है। पढ़ाने का काम शिक्षकों का है। उनका सम्मान सबसे जरूरी है। श्री सिसोदिया ने कहा कि पांच साल में हमने शिक्षकों के सम्मान और उनकी सुविधा को सबसे जरूरी समझा, जिसके कारण शिक्षा का इतना विकास हुआ।

 

सिसोदिया ने कहा कि हमारी चाहत और हमारी जरूरत में फर्क होता है। शिक्षा हमारी चाहत नहीं बल्कि जरूरत है। शिक्षा के जरिए ही हमारे सारे सपने पूरे होंगे। हम बड़े सपने देखें और उन सपनों को पूरा करने की जिम्मेवारी भी लें।

 

इस दौरान एसएमसी के विभिन्न सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए स्कूल संचालन के दायित्व पर प्रसन्नता जाहिर की। शिक्षकों के अनुसार स्कूल प्रबंधन समितियों के कारण अभिभावकों के साथ एक सहयोगी रिश्ता कायम हुआ है तथा हर चीज के लिए शिक्षा अधिकारियों पर से स्कूल की निर्भरता कम हुई है।

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