शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने किया स्वाधीनता आंदोलन पर ऑनलाइन प्रदर्शनी का उदघाट...

संवाददाता : भोपाल मध्यप्रदेश 


      स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर संस्कृति, पर्यटन एवं आध्यात्म मंत्री उषा ठाकुर ने स्वाधीनता आंदोलन 1920-1947 पर आधारित ऑनलाइन प्रदर्शनी का इंदौर से उदघाटन किया। संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा आयोजित प्रदर्शनी को विभागीय वेबसाइट www.archaeology.mp.gov.in पर देखा जा सकता है। प्रमुख सचिव संस्कृति, पर्यटन और जनसम्पर्क शिवशेखर शुक्ला भी इस अवसर पर उपस्थित थे।


संस्कृति मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दुर्लभ चित्रों और अभिलेखों की यह अद्भुत प्रदर्शनी भावी पीढ़ी का प्रमाण और तथ्यों के साथ मार्गदर्शन करेगी। संस्कृति मंत्री ने प्रदेश के सभी विद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे प्रामाणिक तथ्यों पर आधारित इस ई-बुक प्रदर्शनी को अवश्य देखें ताकि उनका हमारे पूर्वजों द्वारा देश को स्वतंत्र कराने के जुनून, जज्बे और बलिदान की भावना से साक्षात्कार हो।


युवा पीढ़ी के समक्ष इतिहास को ठीक ढ़ंग से रखा जाना अति आवश्यक है। ठाकुर ने कहा कोविड-19 के कारण कार्यक्षेत्र में अनेक प्रतिबंध लगे, परंतु चुनौती का सामना करते हुए हमने अनेक नये-नये रास्ते भी निकाले। संचालनालय में लगने वाली यह ऑनलाइन प्रदर्शनी अब विश्व में कहीं से भी देखी जा सकेगी।



प्रमुख सचिव शिवशेखर शुक्ला ने कहा कि जन-सामान्य विशेषकर नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किये गये कार्यों और बलिदान से परिचित कराने के लिये प्रदर्शनी में महत्वपूर्ण दुर्लभ अभिलेखों और चित्रों का संकलन ई-बुक के माध्यम से रुचिकर ढ़ंग से किया गया है।


स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े मध्यप्रदेश के इंदौर में रोलेट एक्ट से संबंधित पुलिस की रिपोर्ट, भोपाल में सविनय अवज्ञा आंदोलन, असहयोग आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन आदि से संबंधित ऐसे अनेक चित्र और अभिलेख हैं, जो कहीं किसी पुस्तक में नहीं मिलेंगे। श्री शुक्ला ने कहा कि युवा पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम से रूबरू कराने वाली इस प्रदर्शनी को देखने के लिये संचालनालय आने की जरूरत नहीं है, यह एल्बम किसी भी समय विश्व के किसी भी कोने से देखी जा सकेगी।


कार्यक्रम का संचालन उप संचालक गीता सभरवाल ने किया। उन्होंने बताया कि दुर्लभ चित्रों और अभिलेखों का सीडी में संकलन किया जा रहा है, ताकि काग़ज के रूप में स्थित ये अमूल्य दस्तावेज समय के प्रवाह के साथ नष्ट होने से बचे रहें।


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