मंगलवार, 1 सितंबर 2020

आईआईटी रुड़की ने प्रोफेसर आनंद स्वरूप आर्या (1931-2019) की स्मृति में इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसरशिप की स्थापना की...

संवाददाता : रुड़की उत्तराखंड 


      भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की ने 1 सितंबर 2020 को अपने दिवंगत प्रोफेसर आनंद स्वरूप आर्या की पहली पुण्यतिथि केअवसर पर उनके सम्मान और स्मृति में एक इंस्टीट्यूट चेयर प्रोफेसरशिप की स्थापना की घोषणा की। दिवंगत प्रोफेसर की पत्नी श्रीमती कौशल्या देवी आर्या और उनकेबच्चों अरुण, पूनम, अंजलि और अंशुली द्वारा दिए गए दान से इस चेयर की स्थापना की गई है, ताकि पेशेवर जीवन में डॉ. आर्या के योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरितकरते रहें।डॉ. आर्या का जन्म 13 जून 1931 को भारत में उत्तर प्रदेश राज्य के सहारनपुर जिले के अंबेहटा गाँव में हुआ था।


अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद, उन्होंने रुड़कीविश्वविद्यालय (अब आईआईटी रुड़की) में प्रवेश लिया और 1953 में बी.ई. (सिविल इंजीनियरिंग) और 1954 में एम.ई. (स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग) में डिग्री हासिल की और एक संकाय सदस्य के रूप में विश्वविद्यालय से जुड़ गए। बाद में वे 1959 में इलिनोइस विश्वविद्यालय, उरबाना-शैम्पेन, यूएसए चले गए, जहां उन्होंने 1961 में डॉक्टरेट कीउपाधि प्राप्त की। पीएचडी डिग्री प्राप्त करने के बाद, डॉ. आर्या विश्वविद्यालय लौट आए।



उन्होंने भूकंप इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वह 1971 मेंभूकंप इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख के पद पर आसीन हुए, 1988 में प्रो-वाइस-चांसलर बने और 1989 में सेवानिवृत्ति के बाद भी एमेरिटस प्रोफेसर के रूप में अपनीसेवाएं प्रदान करते रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वह पेशेवर जीवन में सक्रिय रहे और 88 वर्ष की आयु में अंतिम सांस लेने तक देश की सेवा करते रहे।इंजीनियरिंग की दुनिया में प्रोफेसर आर्या की एक खास पहचान है, जिनके संरचनात्मक इंजीनियरिंग, भूकंप इंजीनियरिंग और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अग्रणी योगदानने उन्हें अपने जीवनकाल में ही एक लेजेंड बना दिया।


आईआईटी रुड़की उनकी कर्म भूमि थी, जहाँ 36 वर्ष की अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने एक शिक्षक के रूप में ख्यातिअर्जित की। उनके छात्र उन्हें हमेशा छोटे और बहुमंजिला भवनों, धनुषाकार और शेल संरचनाओं, पुलों, बांधों और परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के डायनामिक विश्लेषण औरसंरचनाओं के डिजाइन में अविस्मरणीय ज्ञान प्रदान करने के लिए याद करेंगे। अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने रुड़की विश्वविद्यालय तथा भारत और दुनिया के कईअन्य संस्थानों में पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए भूकंप इंजीनियरिंग के विभिन्न क्षेत्रों में कई विशेष पाठ्यक्रम पेश किए।


वे कई पत्रों और पुस्तकों के लेखक औरसह-लेखक भी रहे, जिनमें से कई उनकी सेवानिवृत्ति के बाद लिखे गए थे। एक पेशेवर के रूप में उनकी अनूठी विशेषता एक अनिश्चित इको-सिस्टम के बावजूद जटिलसंरचनात्मक समस्याओं के लिए अभिनव इंजीनियर और उपयुक्त व्यावहारिक समाधान की तलाश थी।


प्रोफेसर आर्या ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में अपनी सेवाएं दी। वे इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ़ अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के सह-स्थापना थे और 1977-84 केदौरान एसोसिएशन के निदेशक रहे। वे संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों जैसे यूनेस्को, यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन सेटलमे


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