शनिवार, 5 सितंबर 2020

" मेरे लिए हैं " कवयित्री श्वेता सिंह की कलम से...

कवयित्री श्वेता सिंह की कलम से...


 


" मेरे लिए हैं  "


                                                                 


बदलते ये रहते हैं मौसम


मेरे लिए हैं,


ये झरनों की, नदियों की सरगम,


मेरे लिए हैं,


 


हरी-भरी ये वादियाँ...


मेरे साथ उनकी तन्हाइयाँ...


पहाड़ों से आगे


आसमां की ऊँचाइयाँ...


चलते रहते चाँद सूरज हर दम,


मेरे लिए हैं,


 


चट्टानों से टकरा कर वापस आती


आवाज़ मेरी...


महकती ये हवाएँ...


मेरे लिए हैं,


 


बादल ये आसमां में


ये चमकते सितारे


कभी ज़्यादा कभी कम...


मेरे लिए हैं... !!


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