मंगलवार, 15 सितंबर 2020

यमुना नदी से गुरुग्राम और आगरा कैनाल में जाने वाले प्रदूषित पानी को साफ करने के लिए परम्परागत...

संवाददाता चंडीगढ़ हरियाणा 


      हरियाणा के परिवहन तथा खान एवं भू-विज्ञान मंत्री मूलचन्द शर्मा ने कहा कि यमुना नदी से गुरुग्राम और आगरा कैनाल में जाने वाले प्रदूषित पानी को साफ करने के लिए परम्परागत तौर-तरीकों के साथ-साथ आधुनिक टेक्नॉलोजी का भी इस्तेमाल किया जाना चाहिए ताकि लोगों को प्रदूषित पानी से होने वाली जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सके और खेतों की सिंचाई के लिए भी साफ पानी उपलब्ध हो सके।        


मूलचंद शर्मा मंगलवार यहां हरियाणा निवास में गुरुग्राम व आगरा कैनाल में प्रदूषित पानी के मुद्दे पर गठित कमेटी की एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान आगरा व गुरुग्राम कैनाल में प्रदूषित पानी को लेकर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में तीन कम्पनियों की तरफ से पानी साफ करने की टैक्नॉलोजी के सम्बंध में प्रस्तुतीकरण भी दिए गये। इन पर चर्चा के बाद परिवहन मंत्री ने अधिकारियों को इन कम्पनियों के साथ करार करने की संभावनाएं तलाशने के मकसद से अगली बैठक में पूरी तैयारी के साथ आने के निर्देश दिए।



बैठक में विधायक सत्य प्रकाश, आफताब अहमद, मामन खान, सीमा त्रिखा, राजेश नागर, प्रवीण डागर और दीपक मंगला को मिलाकर कुल सात विधायकों ने शिरकत की। ये सभी विधायक प्रभावित जिलों पलवल, फरीदाबाद, गुरुग्राम और मेवात से आते हैं। इस दौरान विधायकों ने पानी के प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए कई रचनात्मक सुझाव दिए।


बैठक में बताया गया कि यमुना नदी प्रदेश के यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद और पलवल जिलों से होते हुए हरियाणा के कुल 179 किलोमीटर क्षेत्र से गुजरती है। यह नदी जिला सोनीपत के पल्ला गांव से दिल्ली में प्रवेश करती है और पल्ला से दिल्ली के जैतपुर तक 52 किलोमीटर कवर करती है। इसके बाद यह ओखला हैड के निकट जिला फरीदाबाद से पुन: राज्य में प्रवेश करती है। इस साल जनवरी से अगस्त माह तक किए गए  पल्ला से गुरुग्राम कैनाल, बदरपुर तक पानी की गुणवत्ता के अध्ययन से पता चलता है कि हरियाणा से दिल्ली को साफ पानी जाता है परन्तु बदरपुर बॉर्डर तक पहुंचते-पहुंचते यह बुरी तरह से प्रदूषित हो जाता है। 


इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि दिल्ली के क्षेत्र में 62 ड्रेन यमुना में जबकि 3 ड्रेन आगरा कैनाल में गिरती हैं। दिल्ली 3800 एमएलडी सीवेज जनरेट करती है जबकि इसके पास 2330 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट हैं और यह केवल 1575 एमएलडी ही उपचारित कर पाती है। इसी तरह, हरियाणा से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 11 प्रमुख ड्रेन यमुना में गिरती हैं ।


इसके बाद 16 जुलाई, 2020 को परिवहन मंत्री श्री मूलचन्द शर्मा की अध्यक्षता में कमेटी का पुनर्गठन किया गया और गुरुग्राम, मेवात, फरीदाबाद और पलवल जिलों के विधायकों को सदस्य जबकि बोर्ड के सदस्य सचिव को इसका मेम्बर कन्वीनर बनाया गया। पिछली कमेटी के निर्णय के अनुसार शहरी स्थानीय निकाय और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिवों को भी आमंत्रित किया गया।


बैठक में वन एवं वन्य प्राणी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आलोक निगम,  सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेन्द्र सिंह, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के महानिदेशक अमित अग्रवाल, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन अशोक खेत्रपाल तथा सदस्य सचिव एस.नारायणन समेत सम्बंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।


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