शनिवार, 21 दिसंबर 2019

दिव्यांगजनों के लिए नामांकन से लेकर निर्वाचन तक सभी प्रक्रिया फ्रेंडली बनाए जाने की जरूरत : मुख्य चुनाव आयुक्त

संवाददाता : जयपुर राजस्थान


       मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि निर्वाचन में दिव्यांगों की भागीदारी तब ही प्रभावी होगी, जब नामांकन से लेकर निर्वाचन तक की सभी प्रक्रियाएं दिव्यांगजनों के अनुकूल हो। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की समस्याओं पर व्यक्तिगत और पारिवारिक सोच से ज्यादा चिंतन की जरूरत है।

 


 

अरोड़ा गुरुवार को दिल्ली में 'सुगम मतदान' विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बूथ लेवल अधिकारी से लेकर चुनाव आयोग के हर अधिकारी-कर्मचारी को इस बारे में काम करना होगा। उन्होंने कहा कि 2019 में हुए चुनाव की थीम भी सुगम मतदान थी, जिसके चलते देश भर में दिव्यांगों को मतदान केंद्रों पर अधिकार मिले और वे काफी तादात में मतदान केंद्र तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि झारखंड में हाल ही हुए चुनाव में 90 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगजनों ने अपने मतदाधिकार का इस्तेमाल किया, जो कि बेहद खुशी की बात है। 

 

इस अवसर पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने कहा कि चुनाव आयोग दिव्यांगजनों को निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ने के कायोर्ं में देश के जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने बेहतर काम करके दिखाया है लेकिन अभी भी लंबा रास्ता बाकी है। इस अवसर पर चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा, सचिव उमेश सिन्हा सहित कई उच्चाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। राजस्थान से अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुणाल ने कार्यशाला में शिरकत की।

 

गौरतलब है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा सुगम मतदान की थीम पर इस राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य निर्वाचन प्रणाली को दिव्यांगजनों और वरिष्ठ नागरिकों के अनुकूल बनाने के प्रयासों की समीक्षा व इस प्रक्रिया को और अधिक समावेशी और सुगम बनाने के लिए आवश्यक कदमों पर विचार-विमर्श करना था।