बुधवार, 21 अक्तूबर 2020

मनसुख मंडाविया ने "वीटीएस और वीटीएमएस के लिए स्वदेशी सॉफ्टवेयर समाधान के विकास" का शुभारंभ किया...

संवाददाता : नई दिल्ली

जहाजरानी राज्य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) मनसुख मंडाविया ने आज नई दिल्ली में समुद्री यातायात सेवा और पोत यातायात निगरानी व्‍यवस्‍था  के लिए स्वदेशी सॉफ्टवेयर समाधान के विकास का शुभारंभ किया।

उद्घाटन संबोधन में, मंडाविया ने भारतीय बंदरगाहों के यातायात प्रबंधन के लिए उच्च लागत वाले विदेश निर्मित सॉफ्टवेयर समाधानों पर भरोसा करने के बजाय देश की आवश्यकता के अनुसार स्वदेशी प्रणाली के विकास पर जोर दिया।

मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ परिकल्‍पना के अनुरूप ‘मेड इन इंडिया’ वीटीएस और वीटीएमएस सॉफ्टवेयर ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ पोत यातायात प्रबंधन प्रणालियों का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

आईएमओ सम्‍मेलन के एसओएलएएस (सेफ्टी ऑफ लाइफ एट सी) के तहत वीटीएमएस का पालन अनिवार्य है। ट्रैफिक इमेज को रडार, एआईएस, दिशा खोजने, सीसीटीवी और वीएचएफ या अन्य सहकारी प्रणालियों और सेवाओं जैसे उन्नत सेंसर के माध्यम से संकलित और एकत्र किया जाता है। एक आधुनिक वीटीएमएस उपयोग की आसानी के लिए और प्रभावी यातायात संगठन और संचार के वास्‍ते अनुमति देने के लिए सभी ऑपरेटर को एक ही स्‍थान पर एकत्र करता है।

वर्तमान में, भारत में भारतीय तट के साथ लगभग 15 वीटीएस सिस्टम चालू हैं लेकिन वीटीएस सॉफ्टवेयर की एकरूपता नहीं है क्योंकि प्रत्येक प्रणाली का अपना वीटीएस सॉफ्टवेयर है। आत्‍मनिर्भर भारत पहल के तहत स्वदेशी वीटीएमएस सॉफ्टवेयर के विकास में लाइट एंड लाइटहाउस (डीजीएलएल) के महानिदेशक कार्यालय के साथ हाल के सकारात्मक सहयोग से स्वदेशी सॉफ्टवेयर के विकास के साथ-साथ  इस क्षेत्र में सहयोग मजबूत होगा। यह भारत और समूचे क्षेत्र में बंदरगाह क्षेत्र के लिए लाभकारी होगा। उम्मीद है कि अगले दस महीने में एक प्रोटोटाइप प्रणाली को परीक्षण के लिए विकसित किया जा सकेगा और जब तक कि यह दिन-प्रतिदिन संचालन के लिए मजबूत न हो, इसे एक समानांतर प्रणाली के रूप में संचालित किया जाएगा।

स्वदेशी वीटीएस सॉफ्टवेयर के विकास से इस क्षेत्र में होने वाले विदेशी मुद्रा के खर्च में कमी आएगी और वीटीएस सॉफ्टवेयर के लिए विदेशी समर्थन पर निर्भरता कम होगी। वीटीएस सॉफ्टवेयर के स्वदेश में विकास से होने वाले लाभ :-

  1. भारत में विभिन्न वीटीएस पर होने वाले विदेशी मुद्रा के खर्च की बचत।
  2. वीटीएस सॉफ्टवेयर भारतीय व्यापार अनुकूल राष्ट्रों जैसे मालदीव, मॉरीशस, म्यांमार, श्रीलंका, बांग्लादेश और खाड़ी देशों को प्रदान किया जा सकता है।
  3. सॉफ्टवेयर के भविष्य में किए जाने वाले उन्नयन की लागत को भी कम करेगा।
  4. बंदरगाहों के एमआईएस/ईआरपी सॉफ्टवेयर्स के साथ जुड़ना आसान होगा।
  5. भारतीय वीटीएस सॉफ्टवेयर की उपलब्धता भारतीय कंपनियों को वैश्विक निविदाओं में व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाएगी।

डीजीएलएल द्वारा भारतीय नौसेना और एनसीवीटीएस के राष्ट्रीय समुद्री डोमेन जागरूकता कार्यक्रम का कार्यान्वयन - तटीय शिपिंग के वास्‍ते एक समयोचित और परस्‍पर संवाद आधारित सहयोगी नेविगेशन प्रणाली, कम लागत पर और स्‍वदेशी वीटीएस सॉफ्टवेयर के साथ संभव होगी।जहाजरानी मंत्रालय ने स्वदेशी वीटीएस सॉफ्टवेयर के विकास के लिए आईआईटी, चेन्नई को 10 करोड़ रूपये की राशि मंजूर की है।

इस कार्यक्रम के दौरान, जहाजरानी मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, प्रमुख बंदरगाहों के अध्यक्ष और आईआईटी, चेन्नई के प्रतिनिधि भी वर्चुअल माध्‍यमों से मौजूद थे।

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मुख्यमंत्री चौहान से मिले सतना जिले के युवा साइकिल यात्री...

 संवाददाता : भोपाल मध्यप्रदेश 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मंगलवार सतना से भोपाल तक बालिकाओं और नारियों की अस्मिता, सम्मान और सुरक्षा का संदेश लेकर निकले 6 युवाओं के प्रतिनिधि मंडल ने मुख्यमंत्री निवास पर भेंट की। 

ये युवा आरंभ समिति के सदस्य हैं। दल में शामिल युवाओं अंकित, रोहित, प्रदीप, अभिलाष, नारायण और रावेन्द्र ने मुख्यमंत्री चौहान को सतना से 14 अक्टूबर को निकली साइकिल यात्रा के उद्देश्यों की जानकारी दी। यह साइकिल यात्रा कटनी, दमोह, सागर, विदिशा में लोगों को जागरूक करते हुए भोपाल तक पहुंची। 



युवाओं ने मुख्यमंत्री चौहान से आग्रह किया कि बालिकाओं और स्त्रियों की अस्मिता और सम्मान के लिए अधिक कठोर कानून प्रावधान किए जाएं। जिन महिलाओं के साथ असम्मानजनक व्यवहार और दुष्कर्म जैसी घटनाएं हो जाती हैं, उन्हें जल्दी न्याय मिलना चाहिए। 

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि एक अच्छे संदेश को समाज तक पहुंचाने में इन युवाओं की पहल प्रशंसनीय है।मुख्यमंत्री चौहान ने साइकिल यात्री दल को इस यात्रा के आयोजन के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं।

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शिक्षा मंत्री रूल्याणापट्टी में जीएसएस का शिलान्यास लक्ष्मणगढ़ के किसानों को मिलेगी दिन में बिजली चार नए जीएसएस निर्माण की घोषणा...

 संवाददाता : जयपुर राजस्थान

शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने मंगलवार को सीकर जिले के रूल्याणा पट्टी गांव में डेढ़ करोड़ की लागत से बनने वाले नये 33/11 केवी जीएसएस का शिलान्यास किया। इस अवसर पर  शिक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के किसानों को अब फसलों की सिंचाई के लिए दिन में विद्युत सप्लाई की जाएगी। 
 
शिक्षा राज्य मंत्री डोटासरा ने कहा कि कोविड के साथ विकास के काम भी आवश्यक है। संक्रमण काल में प्रदेश सरकार द्वारा किए गए कामों की प्रशंसा प्रधानमंत्री ने भी की है। डोटासरा ने कहा की 15 करोड़ से घस्सू, सिंगोदड़ा, तिड़ोकी बड़ी में तीन नए जीएसएस तथा मानासी में 220 केवीए का नया जीएसएस बनाया जायेगा। इस घोषणा का क्षेत्र के लोगों ने जोरदार स्वागत किया। इलाके में फिलहाल पन्द्रह करोड़ से जीएसएस व अन्य काम चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लक्ष्मणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में 27 स्कूलों को क्रमोन्नत कर 22 करोड़ रुपए से शिक्षा विभाग में विकास के काम कराए जा चुके हैं। उन्होंने ग्रामीणों की मांग पर भिलुण्डा से रूल्याणी सड़क, भाखरों की ढ़ाणी में ट्यूबवेल, चार लाख रूपयों से रूल्याणापट्टी स्कूल में कम्प्यूटर लेब बनाने की घोषणा की। डोटासरा ने कहा कि जल्द ही क्षेत्र में नई सड़कों की स्वीकृति जारी होने वाली है। मीठे पानी को घर-घर पहुंचाने के लिये केन्द्र से स्वीकृति का इंतजार है।
 
समारोह में अजमेर विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक वी.एस भाटी ने कहा कि लक्ष्मणगढ़ में सबसे ज्यादा जीएसएस बने है।  लक्ष्मणगढ़ कस्बे में रिंग जीएसएस की व्यवस्था पर भी काम किया जा रहा है। पिछले साल साढ़े सात करोड़ रुपए निगम द्वारा विद्युत की सुचारू आपूर्ति की यवस्थाओं पर खर्च किए गए है तथा इस वर्ष आठ करोड रूपये के काम प्रगतिरत है।सहित जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणजन बड़ी संख्या में मौजूद रहें।

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गोधन न्याय योजना,गोबर विक्रेताओं को 6वीं किश्त के रूप में 9.12 करोड़ रूपए का हुआ ऑनलाइन भुगतान...

 संवाददाता : रायपुर छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार राज्य शासन की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना‘ के तहत राज्य के 86 हजार 158 पशु पालकों से की गई गोबर खरीदी के एवज में 6वीं किस्त की राशि 9 करोड़ 12 लाख रूपए का ऑनलाइन भुगतान किया। गोधन न्याय योजना के तहत अब तक गोबर विक्रेताओं को 39 करोड़ रूपए का भुगतान किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल मंगलवार अपने निवास कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित गोधन न्याय योजना के कार्यक्रम में बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के गोढ़ी और रायगढ़ जिले के ननसिया के गौठान के स्व-सहायता समूह की महिलाओं से चर्चा की और उनकी आयमूलक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने महिला समूहों द्वारा गौठान में सब्जी-भाजी के उत्पादन से लेकर वर्मी कम्पोस्ट सहित अन्य आयमूलक गतिविधियों के सफल संचालन के लिए उन्हें बधाई और शुभकामानएं दी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुराजी गांव योजना के तहत गांवों में गौठान के निर्माण एवं उसके संचालन के साथ-साथ गोधन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी की प्रक्रिया और वर्मी खाद के उत्पादन पर प्रसन्नता जताई और कहा कि सभी विभागों के समन्वित प्रयास से गौठान और गोधन न्याय योजना का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टरों एवं जिला पंचायतों के मुख्यकार्यपालन अधिकारियों को गौठानों में क्रय किए जा रहे गोबर से बनने वाली वर्मी खाद की पैकेजिंग और उसके विपणन की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गौठानों में बनने वाली खाद का सोसायटियों के माध्यम से विक्रय और गौठान समिति के खाते में खाद के विक्रय की राशि का जमा होना जरूरी है, ताकि गौठान समितियां स्वावलंबी और स्वयं की राशि से गोबर की खरीदी करने में सक्षम बन सके। उन्होंने कहा कि गोधन न्याय योजना की सतत् मॉनिटरिंग जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को गांवों में पशुधन की संख्या, गोबर की आवक को ध्यान में रखते हुए गौठानों में वर्मी टांके का निर्माण कराए जाने के निर्देश दिए, ताकि क्रय किए गए गोबर से वर्मी खाद बनाने की प्रक्रिया अनवरत रूप से जारी रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे बड़े गांव एवं नगरीय क्षेत्र जहां गोबर की आवक अत्याधिक होती है, वहां गोबर गैस प्लांट लगाए जाने चाहिए, इससे आय में और वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री ने सभी गौठानांे में आजीविका ठौर की स्थापना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे गौठानों में आयमूलक गतिविधियों के संचालन में सुविधा होगी और गौठानों में चहल-पहल बनी रहेगी। उन्होंने कलेक्टरों को स्थानीय बाजारों की डिमांड के अनुरूप गौठानों में उत्पादन गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही। मुख्यमंत्री ने इस दौरान सभी जिले के कलेक्टरों से गौठानों के संचालन एवं वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन एवं विक्रय के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से यह भी जानना चाहा कि वर्मी खाद के विक्रय की वजह से जिलों के कितने गौठान गोधन न्याय योजना के संचालन के लिए स्वावलंबी हो चुके है।

कार्यक्रम कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि गोधन न्याय योजना गरीबों, ग्रामीणों और किसानों को मदद पहुंचाने वाली योजना है। विगत 20 जुलाई से शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 39 करोड़ रूपए का भुगतान गोबर बेचने वाले पशुपालकों को किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि वर्मी खाद के विपणन के लिए प्राथमिक सहकारी समितियों से इसका लिंकेज किया जाना है। इस मौके पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि गोधन न्याय योजना की लोकप्रियता और सफलता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार राज्य के 11 हजार 664 ग्राम पंचायतों में इस वर्ष के अंत तक गौठान का निर्माण कराया जाना है। उन्होंने सभी कलेक्टरों को गौठानों में पर्याप्त संख्या में वर्मी टांके का निर्माण कराए जाने की
निर्देश दिए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ. एम.गीता ने बताया कि राज्य में 5454 गौठान निर्मित है, जिसमें से 3068 गौठानों में गोबर की खरीदी की जा रही है। गौठानों में औसत रूप से 30 हजार क्विंटल गोबर की रोजाना क्रय किया जा रहा है। अब तक 19 लाख 20 हजार 412 क्विंटल गोबर क्रय किया गया है। उन्होंने बताया कि गोबर विक्रेताओं में अन्य पिछड़ा वर्ग के 51 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति वर्ग के 37 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति वर्ग के 7.69 प्रतिशत हितग्राही शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार द्वय श्री प्रदीप शर्मा एवं श्री रूचिर गर्ग, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्री गौरव द्विवेदी, सहकारिता सचिव श्री आर. प्रसन्ना, सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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जन सुविधा के लिए राजस्व विभाग के कानूनों का होगा सरलीकरण : महेंद्र सिंह

 संवाददाता : शिमला हिमाचल

 
भू-कानूनों पर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी की बैठक मंगलवार यहां जल शक्ति एवं राजस्व मन्त्री महेंद्र सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के दौरान राजस्व विभाग से सम्बन्धित कानूनों के सरलीकरण के लिए कार्यसूची की मदों पर विस्तृत चर्चा की गई जिसमें तकसीम, निशानदेही, इन्तकाल, दुरूस्ति इन्द्राज से सम्बन्धित न्यायालय मामलों के शीघ्र निपटारे को लेकर कमेटी के सदस्यों ने अपने सुझाव दिए।
 
महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 94902 मामले विभिन्न राजस्व न्यायालयों मे लम्बित पडे़ हैं। इनमें तकसीम के 29313, निशानदेही के 18025, इन्तकाल के 25251, दुरूस्ति इन्द्राज के 2497, अतिक्रमण के 2837 और 16790 अन्य मामले शामिल हैं।
 
उन्होंने कहा कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुरूप, प्रदेश सरकार ने भूमिहीन एवं गृहहीन परिवारों को रिहायषी मकान के निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्रांे में तीन बिस्वा और शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा भूमि देने का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त, जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ नियमों के अंतर्गत, नौतोड़ भूमि आबंटन का प्रावधान है, लेकिन इन क्षेत्रों में भी वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधान लागू होने के कारण भूमि का आबंटन नहीं हो पा रहा है। समिति ने इस समस्या पर गहन विचार किया तथा इसके निराकरण के लिए सुझाव दिए।
 
सदस्यों का कहना था कि तकसीम, निशानदेही, इन्तकाल, दुरूस्ति इन्द्राज आदि के मामलों में समनों की तामील समय पर नहीं होने का कारण बहुत विलम्ब होता है इसलिए समनों की तामील समयबद्ध और कारगर बनाई जाए। इसके अतिरिक्त, बन्दोबस्त की प्रक्रिया को सरल करने और इसमें आधुनिक उपकरणों की सहायता के इस्तेमाल के सुझाव दिए गए। सदस्यों ने भू-राजस्व के निर्धारण को सरल एवं समयबद्ध बनाने का सुझाव भी दिया।
 
सदस्यों ने विभाग के ध्यान में लाया कि प्रदेश में ऐसे बहुत से मामले लम्बित हैं जिनमें सरकारी भूमि को नौतोड़ के रूप में पात्र व्यक्तियों को आबंटित किया गया है, लेकिन इसके पट्टे जारी नहीं हुए हैं या इंतकाल लम्बित है। इस कारण अभी तक मालिकाना हक नहीं मिले हैं तथा उन्हे अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू-सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 45, 104 व 118 पर विचार करने के उपरान्त इन्हें व्यावहारिक बनाने के लिए आवश्यक संशोधन का सुझाव दिया। बैठक में धारा-118 के प्रावधानों को इसके मूल उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इसमें मौजूद कमियों को दूर करने पर विचार किया गया साथ ही इसे प्रदेश के विकास एवं रोजगार सृजन के दृष्टिगत सरल एवं पारदर्शी बनाने पर चर्चा की गई।
 
बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के बाद राजस्व मन्त्री ने विधायक राम लाल ठाकुर, जगत सिंह नेगी, राकेश सिंघा, नरेन्द्र ठाकुर, बलवीर सिंह और बिक्रम जरयाल की अध्यक्षता में उप-समितियों का गठन किया। उप-समितियां आज की बैठक में हुई चर्चा और प्राप्त सुझावों के साथ सभी मामलों में अपनी सिफारिशें 30 नवम्बर, 2020 से पहले प्रस्तुत करेंगी, जिन पर समिति की आगामी बैठक में विचार किया जाएगा।
 
इस बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्व आर.डी धीमान, निदेशक भू-अभिलेख सी.पी वर्मा, शिमला के बन्दोबस्त अधिकारी मनमोहन शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता जी.डी. वर्मा, दीपक कौशल, भूपेन्द्र गुप्ता, शशि पंडित व पवन कपरेट, सेवानिवृत्त अधिकारी उग्रसेन नेगी, इन्द्रसिंह भारद्वाज, राकेश मेहता और सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्य उपस्थित हुए।

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मंगलवार, 20 अक्तूबर 2020

हाशिये पर खड़े लोगों के उत्थान व उन्हें लाभान्वित करने के लिए हो व्यय : उद्योग सचिव

 संवाददाता : रांची झारखंड

उद्योग सचिव पूजा सिंघल की अध्यक्षता में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की तीन दिवसीय बैठक मंगलवार को सम्पन्न हो गई। बैठक में 31 कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सीएसआर फण्ड के तहत झारखण्ड में किये गए कार्यों से उद्योग सचिव को अवगत कराया।

बेहतर परिणाम देना है

उद्योग सचिव ने कहा कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत लाभुकों और योजनाओं के चयन में पूरी सतर्कता बरतने का प्रयास करना श्रेष्ठकर होगा। यह महत्वपूर्ण है कि प्रभावी परिणाम प्राप्त करने के लिए सीएसआर फण्ड का विश्लेषण लगातार हो। फण्ड का उपयोग हाशिये पर खड़े लोगों के उत्थान व उन्हें लाभान्वित करने के लिए होना चाहिए।

वित्तीय वर्ष 2019-20 में 425 करोड़ रुपये किया गया व्यय

उद्योग सचिव को प्रतिनिधियों ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में 425 करोड़ रुपये सीएसआर में व्यय किया गया है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में शिक्षा, पोषण, स्वच्छता और जरूरतमंदों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराने में अधिक ध्यान दिया जायेगा।

बैठक में आईओसीएल, बीपीसीएल, ओएनजीसी, टाटा स्टील, त्रिवेणी सनिक, हुडको, एसीसी, डालमिया सीमेंट, अडानी पावर, ग्रासिम, इलेक्ट्रोस्टील व खनन कंपनियां शामिल थीं।

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हंसने-मुस्कराने से कम फायदेमंद नहीं झूमना-नाचना...

 संवाददाता : लख़नऊ उत्तरप्रदेश

कहते हैं, हमेशा हंसते-मुस्कराते रहना बीमारियों से बचाव का सबब कारगर जरिया है। हालांकि, ब्रिटेन में हुए एक नए अध्ययन की मानें तो नाचना-गाना भी सेहत के लिए कम फायदेमंद नहीं। इससे वजन नियंत्रित रखने के साथ ही ‘फील गुड’ हार्मोन का स्त्राव बढ़ाने और स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ का उत्पादन घटाने में अच्छी-खासी मदद मिलती है।

‘द पोल’ के अध्ययन में दो हजार वयस्क शामिल हुए। इनमें से 80 फीसदी ने डांस को तनाव की छुट्टी करने में बेहद असरदार करार दिया। 75 प्रतिशत ने कहा, टीवी या मोबाइल पर गाना बजाकर नाचने में उन्हें अजब-सी खुशी मिलती है। 50 फीसदी ने माना कि झूमने-नाचने से काम का बोझ ज्यादा महसूस नहीं होता और चिड़चिड़ेपन के एहसास में भी कमी आती है। 

मुख्य शोधकर्ता डॉ. पीटर लोवाट के मुताबिक नृत्य न सिर्फ रोजमर्रा के तनाव से ध्यान भटकाता है, बल्कि सोचने का अंदाज भी बदलता है। जब इनसान अलग-अलग मुद्राएं धारण करता है तो सेराटोनिन और डोपामाइन जैसे ‘फील गुड’ हार्मोन ज्यादा मात्रा में पैदा होने लगते हैं।

साथ ही ‘ओपियॉएड रिसेप्टर’ भी अधिक सक्रिय हो जाता है और दर्द का एहसास खुद बखुद घटने लगता है। इसके अलावा ‘कॉर्टिसोल’ के उत्पादन में कमी लाने में भी नृत्य की अहम भूमिका पाई गई है।

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