मंगलवार, 31 मार्च 2020

डॉक्टर के मिलने से पहले इन 7 बातों का ध्यान रखें...

रेनू डबराल  @ नई दिल्ली


      किसी भी तकलीफ की स्थिति में डॉक्टर के पास जाते हैं तो वे सबसे पहले लक्षण देखते हैं, कुछ टेस्ट करवाते हैं और फिर उस हिसाब से इलाज करते हैं। लेकिन यदि टेस्ट की रिपोर्ट सटीक न हो तो डॉक्टर भी भ्रमित हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से मिलने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इससे लक्षणों और टेस्ट रिपोर्ट में अंतर आ सकता है। इसलिए डॉक्टर के मिलने से पहले इन 7 बातों का ध्यान रखें।


त्वचा विशेषज्ञ 3,000 से अधिक बीमारियों का इलाज करते हैं। एग्जामिनेशन के दौरान, डॉक्टर को न केवल त्वचा बल्कि नाखूनों की भी जांच करनी होती है। कई फंगल संक्रमण आमतौर पर वहां स्थित होते हैं। डॉक्टर के लिए मरीज के नाखूनों की प्राकृतिक स्थिति को देखना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, नाखूनों में कोई भी परिवर्तन अन्य अंगों के रोगों का संकेत हो सकता है, इसलिए उन्हें पर्याप्त ध्यान देने की कोशिश करें।



इस तथ्य के बावजूद कि बीयर कोलेस्ट्रॉल फ्री हैं, उनमें बहुत अधिक चीनी के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट होते हैं जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल की तेज उछाल का कारण बन सकते हैं। जल्द ही कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य हो जाएगा, लेकिन डॉक्टर को इससे गलत नतीजे मिलेंगे।


www.myupchar.com  से जुड़ीं डॉ. मेधावी अग्रवाल का कहना है कि टेस्ट करवाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि खूब मात्रा में पानी पी रहे हैं, ताकि पर्याप्त मात्रा में सैंपल दे सकें। यूरिन टेस्ट के लिए खाना-पीना छोड़ने या किसी प्रकार का बदलाव करने की जरूरत नहीं होती है। इंसान का यूरिन 99 प्रतिशत पानी और केवल 1 प्रतिशत एसिड, अमोनिया, हार्मोन, मृत रक्त कोशिकाओं, प्रोटीन, और अन्य पदार्थ हैं, जो अनुसंधान के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इसमें कॉन्सन्ट्रेशन बहुत कम है। इसलिए यदि 100 मिलीलीटर यूरिन देते हैं, तो इसका लगभग 1 मिलीलीटर एनालिसिस के लिए उपयुक्त है।


मैमोग्राफी या मैमोग्राम टेस्ट स्तनों का एक्स-रे होता है। यह ब्रेस्ट कैंसर की पहचान का तरीका है। एक मैमोग्राम से पहले डियोड्रेंट के इस्तेमाल पर प्रतिबंध इसकी संरचना से संबंधित है, क्योंकि इसमें छोटे मैटेलिक सब्सटेंस होते हैं। प्रक्रिया के दौरान, कैल्सीफिकेशन में गलती संभव है जो कैंसर के विकास का संकेत है।


इससे परिणाम गलत आएंगे।लोनोस्कोपी से पहले रेड फूड न खाएंwww.myupchar.com  से जुड़े डॉ. आयुष पांडे का कहना है कि कोलोनोस्कोपी एक ऐसा टेस्ट है, जिसका इस्तेमाल बड़ी आंत या गुदा में किसी प्रकार की खराबी या असामान्यताओं का पता लगाने के लिए किया जाता है। प्राकृतिक रूप से लाल रंग वाले भोजन कोलोन को रंग सकता है और अध्ययन के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। कोलोनोस्कोपी में एक सप्ताह पहले बीट्स, क्रैनबेरी, रेड कैंडी, रेड फ्रॉस्टिंग, टमाटर और टमैटो सॉस को अवॉइड करें। इसका मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर के पास जाने से पहले एक अलग रंग के खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। चिकित्सा प्रक्रिया से एक दिन पहले, केवल तरल खाद्य पदार्थ खाने चाहिए।


अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन प्रतिदिन 2,300 मिलीग्राम से अधिक नमक का सेवन नहीं करने की सलाह देता है। अन्य हानिकारक प्रभावों के बीच, यह ब्लड प्रेशर में बढ़ोतरी करता है। इसलिए टेस्ट से पहले फास्ट फूड, नट्स, बीन्स, या ऐसे अन्य फूड्स नहीं खाने चाहिए, जिनमें बहुत अधिक नमक होता है।टेस्ट से कुछ दिन पहले अधिक सटीक परिणाम के लिए दवाएं नहीं लेनी चाहिए ताकि ब्लड को किसी भी बाहरी कारकों द्वारा प्रभावित और शुद्ध करने का समय न हो। रोजाना ली जाने वाली दवाईयों को लेकर आमतौर पर डॉक्टर ब्लड देने से पहले सुबह नहीं लेने के लिए कहते हैं और फिर टेस्ट के बाद लेने की सलाह देते हैं। लेकिन प्रत्येक विशेष मामले में, विशेषज्ञ के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करना बेहतर है।


संक्रमितों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र और केरल सबसे आगे...

संवाददाता : नई दिल्ली


      देश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि देशभर में अब तक 1071 लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। इनमें से 99 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 29 लोगों की जान गई है। राज्यवार डेटा पर नजर डालें तो संक्रमितों की संख्या के मामले में महाराष्ट्र और केरल सबसे आगे हैं।  चले देखते हैं किस राज्य में क्या हालात ।



केरल
दक्षिण भारत के इस राज्य में 194 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक संक्रमितों की संख्या केरल में है। राज्य में अभी तक मरीज की जान गई है।


महाराष्ट्र
193 संक्रमितों के साथ महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित राज्य है। कोरोना वायरस की वजह से राज्य में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है। 25 मरीज पूरी तरह ठीक होने के बाद घर जा चुके हैं। इस राज्य में अब तक 80 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं। तीन लोगों की मौत हो चुकी है। 5 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं।


यू.पी.
यूपी में अब तक 75 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं। 11 लोग ठीक हो चुके हैं, अन्य का इलाज चल रहा है। यूपी में कोरोना की वजह से किसी की जान नहीं गई है।


तेलगाना
इस राज्य में अभी तक 69 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। एक मरीज ठीक हुआ है, जबकि एक की जान जा चुकी है।


देश की राजधानी दिल्ली
देश की राजधानी में 53 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। यहां दो संक्रमितों की मौत हुई है, जबकि 6 लोग ठीक होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की है। उन्होंने लोगों से वादा किया है कि कोई भी भूखे पेट नहीं सोएगा।


बिहार
बिहार में अब तक 11 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से एक की मौत हो चुकी है। अन्य 10 मरीजों का इलाज चल रहा है।


गुजरात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य में अब तक 58 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से 5 लोगों की मौत हो चुकी है।


तमिलनाडू
दक्षिण के इस राज्य में अब तक कोविड-19 के 50 केस सामने आए हैं। इनमें से 4 ठीक हो चुके हैं। तमिलनाडु में कोविड-19 से एक मरीज की मौत हुई है।


पंजाब एवं हरियाणा
दोनों पड़ोसी राज्यों में क्रमश: 33 और 38 लोग कोरोना से संक्रमित मिले हैं। पंजाब  में कोरोना की वजह से एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि हरियाणा में किसी मरीज की मौत नहीं हुई है। हरियाणा में 17 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि पंजाब में एक मरीज संक्रमण मुक्त हुआ है।


राजस्थान
राजस्थान में 57 लोग कोरोना की चपेट में आए हैं। यहां किसी की मौत कोरोना की वजह से नहीं हुई है। तीन मरीज संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं।


मध्यप्रदेश
मध्य प्रदेश में 33 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं। दो लोगों की मौत हुई है।


अन्य राज्य
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में 31 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। यहां दो लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक मरीज ठीक हो चुका है। आंध्र प्रदेश में अब तक 19 लोग संक्रमित हुए हैं। एक ठीक हो चुका। पश्चिम बंगाल में 19 लोग संक्रमित हुए हैं। यहां भी एक मरीज की मौत हुई है।


चंडीगढ़ में 8 लोग कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं। छत्तीसगढ़ में 7 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। उत्तराखंड में 7 लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं, जिनमें से 2 ठीक हो चुके हैं। गोवा में 5 केस सामने आए हैं। हिमाचल में 3 केस आए, जिनमें से एक की मौत हो गई है। ओडिशा में 3 और अंडमान में 9 मामले सामने आए हैं। मणिपुर, मिजोरम और पुडुचेरी में एक-एक व्यक्ति को कोरोना हुआ है।


टीवीएस ने प्रधानमंत्री राहत कोष में 25 करोड़ रु. देने का वचन दिया...

संवाददाता : मेरठ उत्तरप्रदेश 


टीवीएस मोटर कंपनी ने सोमवार को कहा कि यह कोविड-19 महामारी से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष (पीएम-केयर्स) में 25 करोड़ रु. दान देगी।  कंपनी द्वारा समूह की विभिन्न फर्म्स जैसे टीवीएस क्रेडिट सर्विसेज लिमिटेड, सुंदरम-क्लेटन लिमिटेड व अन्य की ओर ये यह योगदान किया जा रहा है।



टीवीएस मोटर कंपनी की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया कि यह समृद्ध व टिकाऊ समाज सुनिश्चित करने हेतु कंपनी द्वारा लगातार किये जाने वाले प्रयासों के अनुरूप है। कहा गया है कि इस अंशदान के अलावा, कंपनी की ओर से समूह की सीएसआर शाखा, श्रीनिवासन सर्विसेज ट्रस्ट (एसएसटी) के जरिए पहले से ही अन्य राहत व जनहितकारी कार्य किये जा रहे हैं। टीवीएस मोटर कंपनी के चेयरमैन, वेणु श्रीनिवासन ने कहा, ‘‘कोविड-19 महामारी आधुनिक इतिहास की एक अभूतपूर्व घटना है और इस लड़ाई को जीतने के लिए मानवता के सर्वोत्तम मूल्यों का परिचय देना होगा।


हम इससे लड़ने के लिए सरकार के दृढ़संकल्प और उनके द्वारा उठाये गये कदमों की प्रशंसा करते हैं। और अब, अभूतपूर्व रूप से हम सभी के लिए यह आवश्यक है कि एक राष्ट्र के रूप में एक-दूसरे के साथ सहयोग करें व समर्थन दें। एसएसटी सहायताप्रद उपकरण जैसे कि मास्क्स तैयार करने व इसकी आपूर्ति करने जैसे कई अन्य कदम उठा रहा है, ताकि स्वास्थ्यकर्मियों व पुलिसकर्मियों को पकाया हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा सके।


इच्छुक व्यक्ति निम्न अकाउंट में दान दे सकते हैं :मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

संवाददाता : देहरादून उत्तराखंड 


      कोरोना की महामारी से निपटने के लिए आप सभी का सहयोग चाहिए। आपका दिया एक-एक पैसा किसी की जिंदगी बचाने के काम आ सकता है, किसी जरूरतमंद के काम आ सकता है। इच्छुक व्यक्ति निम्न अकाउंट में दान दे सकते हैं।



कोरोना से निपटने के लिये गंगोत्री मंदिर समिति ने दिया एक लाख की मदद...

संवाददाता : उत्तरकाशी उत्तराखंड 


      कोरोना वायरस के संक्रमण से ग्रसित दुनिया भर के देशों में महामारी का रूप ले लिया है।  यहां प्रकोप भाारत देेश मैंं भी धीरे- धीरे शहर  तक पहुंच रहा  है। इस वैश्विक  महामारी  के दौरान कर्मचारी ,सामाजिक कार्यकर्ता सरकर को मदद मैं करने में हाथ बढ़ा रहे हैं ।



मंगलवार को श्री मंदिर समिति गंगोत्री ने कोरोना प्रभावितों के मदद के लिए जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान को एक लाख का चेक भेंट किया । इस दौरान समिति केअध्यक्ष प. सुरेश सेमवाल ,  उपाध्यक्ष प. अरुण सेमवाल , सचिव दीपक सेमवाल, प्रेमबल्लभ सेमवाल कोषाध्यक्ष,  सहसचिव राजेश सेमवाल , संजय सेमवाल मौजूद थे।


राज्यपाल ने चखा गरीबों का भोजन, स्वच्छता और शुद्धता भी देखी...

संवाददाता : भोपाल मध्यप्रदेश


      राज्यपाल लालजी टंडन ने गरीबों को वितरण के लिये राजभवन में बनाये जा रहे भोजन की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने आज सुबह राजभवन के रसोई घर में भोजन पैकेट में रखी जाने वाली खाद्य सामग्री की जानकारी ली। उन्होंने भोजन निर्माण में स्वच्छता और शुद्धता की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। साथ ही, रसोई घर और पैकिंग व्यवस्थाओं की शुद्धता, स्वच्छता और सेनेटाइजेशन की व्यवस्थाएँ देखी। राज्यपाल ने भोजन को चखकर उसकी गुणवत्ता भी जानी।



राज्यपाल टंडन ने भोजन निर्माण कार्य में लगे कर्मचारियों को स्वच्छता के नियमों का कड़ा पालन करने और शुद्ध एवं स्वादिष्ट भोजन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि कोरोना से संघर्ष के इस दौर में हम सबका यह दायित्व है कि कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं रहे। उन्होंने कहा कि राजभवन द्वारा भोजन वितरण व्यवस्था सांकेतिक पहल है ता‍कि समाज के समर्थ व्यक्ति इससे प्रेरणा लेकर गरीब, वंचित और जरूरतमंद व्यक्ति के सहयोग और मदद का दायित्व स्वीकार करें।


राज्यपाल ने राजभवन कर्मियों से कहा कि संकटकाल में आपकी सेवा वास्तव में राष्ट्र की सेवा है। उन्होंने कहा कि भोजन तैयार करने की आकस्मिक व्यवस्थाओं की तैयारी रखें ताकि आवश्यकता पड़ने पर राजभवन प्रशासन को तत्काल और अधिक भोजन के पैकेट उपलब्ध करा सके।


राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की बैठक लॉकडाडन के आदेशों की सख्ती से पालना करवाना होगा : मुख्यमंत्री

संवाददाता  : जयपुर राजस्थान


       मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कोरोना के संक्रमण की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने शुरूआती दौर में ही अच्छा प्रबंधन किया है और समुचित आदेश तथा दिशा निर्देश जारी किये हैं। अब संकट काल में इन आदेशों की जमीनी स्तर पर सख्ती से पालना करवाने की बड़ी चुनौती हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि इसमें राज्य सरकार के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और आमजन सहित सभी की भूमिका महत्तवपूर्ण है। 

 

गहलोत सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर राज्य आपदा प्रबन्धन प्राधिकरण की 21वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहें थे। बैठक में उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, शहरी विकास मंत्री शांति धारीवाल, आपदा प्रबंधन मंत्री मास्टर भंवरलाल मेघवाल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा, कृषि मंत्री श्री लालचंद कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रमेश मीणा, श्रम राज्यमंत्री टीकाराम जूली उपस्थित थे। 

 


 

लोगों के लिए रोजगार और भोजन-पानी का संकट बड़ी चुनौती

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड महामारी के कारण प्रदेश के साथ-साथ पूरी दूनिया में ही हालात चिंताजनक है और लॉकडाउन ही इसका कड़वा, लेकिन उचित इलाज है। संक्रमण के डर के साथ-साथ लॉकडाउन के कारण मजदूरों और गरीब वर्ग के परिवारों को पलायन के दौरान भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना संक्रमण की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित होने से बचाने के लिए सामाजिक दूरी बनाये रखना अति आवश्यक उपाय है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक लॉकडाउन की स्थिति बने रहने पर लोगों के रोजगार और भोजन-पानी का संकट बढ़ने के साथ-साथ कानून व्यवस्था की समक्ष कानून व्यवस्था की चुनौतियां भी बढ़ेंगी, जिसे हमें संवेदनशीलता और दूरदर्शिता से निपटना होगा। 

 

78 लाख परिवारों के 3 करोड़ से अधिक जनसंख्या का सर्वे पूरा 

 

बैठक में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमण की जमीनी स्तर पर स्थिति की जानकरी हासिल करने के लिए युद्ध स्तर पर घर-घर जाकर स्वास्थ्य सर्वे कराया जा रहा है। अभी तक 78 लाख परिवारों के 3 करोड़ से अधिक लोगों का सर्वे किया जा चुका है। इस काम में और अधिक तेजी लाने के लिए पंचायती राज और शिक्षा विभाग के कार्मिकों का सहयोग अपेक्षित है, ताकि सर्वे कार्य जल्द से जल्द पूरा हो सके।

 

बढ़ती बैचेनी के दौर में आमजन को संबल देना होगा ः उप मुख्यमंत्री

 

उप मुख्यमंत्री श्री सचिन पायलट ने स्वास्थ्य सर्वे के लिए ग्राम सेवक, पंचायती राज और शिक्षा विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के सहयोग को आवश्यक बताते हुए लॉकडाउन के दौरान राशन वितरण की बेहतर व्यवस्था के लिए भी विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि सूखी भोजन सामग्री के पैकेट का मानक तय करने और लोगों की बढ़ती बैचेनी के दौर में उन्हें संबल और आशा देने के लिए भी हम सबको को मिलकर विशेष प्रयास करने चाहिए।

 

चिकित्सकों, पैरा-मेडिकल कार्मिकों की सेवानिवृति बढ़ेगी

 

राज्य सरकार नेे कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए 31 मार्च से 31 अगस्त 2020 की अवधि के बीच सेवानिवृत होने वाले सभी चिकित्सकों, स्वास्थ्य अधिकारियों और पैरा-मेडिकल कार्मिकों की सेवानिवृति को 30 सितंबर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। आपदा प्रबंधन एवं राहत के संदर्भ में लिए गए इस निर्णय का बैठक के दौरान अनुमोदन किया गया।

 

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत निर्णयों का अनुमोदन

 

बैठक में कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा जारी आदेशों एवं  दिशा -निर्देशों तथा इनके क्रम में राज्य के आपदा प्राधिकरण की कार्यकारी समिति द्वारा जारी किये गये निर्देशों और आदेशों का अनुमोदन किया गया। साथ ही, राज्य आपदा राहत कोष से कोविड-19 के संक्रमण की जांच एवं इलाज के लिए विभिन्न चिकित्सकीय उपकरणों एवं सुविधाओं की खरीद, लॉकडाउन के कारण बेघर, प्रवासियों एवं श्रमिकों के लिए राहत शिविरों की व्यवस्था, जिला एवं कलक्टरों को अनटाइड फंड के तहत राशि आवंटन सहित आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत लिए गये विभिन्न निर्णयों का अनुमोदन भी किया गया। 

 

बैठक के दौरान खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन और लॉकडाउन की स्थिति में वंचितों के लिए भोजन सामग्री के वितरण के लिए गेंहूं, दाल, तेल आदि की अतिरिक्त खरीद, घर-घर राशन वितरण की स्थिति,  मुनाफाखोरी और कालाबाजारी पर नियंत्रण, फसल कटाई, गेंहूं तथा दालों आदि की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद, मंडियों के संचालन, प्रदेश और अन्य राज्यों में प्रवासियों के पलायन से उपजे हालात, लॉकडाउन के दौरान पुलिस व्यवस्था, आवारा पशु-पक्षियों एवं गौशाला आदि में चारे की उपलब्धता आदि पर गंभीर चर्चा हुई। 

 

मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह राजीव स्वरूप, अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा रोहित कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र सिंह, राज्य स्तरीय ’वार रूम’ के प्रभारी अधिकारी अभय कुमार एवं शासन सचिव आपदा प्रबंधन सिद्धार्थ महाजन ने कोविड-19 के संक्रमण से उपजे हालातों, राज्य सरकार द्वारा किये गए प्रयासों एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति की जानकारी दी। इस दौरान विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव एवं शासन सचिव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समाज कल्याण संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श किया...

संवाददाता : नई दिल्ली


      प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समाज कल्याण के लिए काम करने वाले संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श कि‍या।  


प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा देश ‘कोविड-19’ की विकट चुनौती का सामना करने में असीम हिम्‍मत, दृढ़ता और संयम का परिचय दे रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी को स्‍मरण करते हुए बताया कि बापू कहा करते थे कि गरीबों और विभिन्‍न सुविधाओं से वंचित लोगों की सेवा करना ही राष्ट्र की सेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है और इसके साथ ही उन्होंने मानवता की सेवा के प्रति इन संगठनों के समर्पण और प्रतिबद्धता की सराहना की।


प्रधानमंत्री ने कहा कि इन संगठनों की तीन प्रमुख विशेषताएं हैं: मानवीय दृष्टिकोण, बड़ी संख्‍या में लोगों तक पहुंच एवं उनसे जुड़ाव और सेवा करने की अनुपम मानसिकता, जिसकी बदौलत लोग उन पर आंख मूंद कर विश्वास करते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र एक अप्रत्‍याशित संकट का सामना कर रहा है और इन संगठनों की सेवा एवं उनके संसाधनों की जितनी आवश्यकता अभी है उतनी पहले कभी नहीं रही थी। उन्होंने सुझाव दिया कि ये संगठन गरीबों के लिए बुनियादी आवश्यकताओं की ठोस व्यवस्था करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं और इसके साथ ही वे अपनी चिकित्सा सुविधाओं एवं स्वयंसेवकों को मरीजों तथा जरूरतमंद लोगों की सेवा करने के लिए समर्पित कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने यह बात रेखांकित की कि ‘कोविड-19’ की चुनौती से पार पाने के लिए देश को अल्पकालिक उपायों और एक दीर्घकालिक विजन दोनों की ही सख्‍त आवश्यकता है।



प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि अंधविश्वास, गलत धारणाओं और भ्रामक सूचनाओं से निपटने में उन्‍हें अहम भूमिका निभानी है। उन्होंने इस ओर ध्‍यान दिलाया कि गलत धारणाओं के कारण लोगों को विभिन्‍न स्थानों पर इकट्ठा होते हुए और फि‍र सामाजिक दूरी बनाए रखने के मानदंड का उल्‍लंघन करते हुए देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए सामाजिक दूरी बनाए रखने के विशेष महत्व का और भी अधिक प्रचार-प्रसार करना अत्‍यंत आवश्यक है।


समाज कल्याण संगठनों के प्रतिनिधियों ने अत्‍यंत निपुणता के साथ एक जटिल परिस्थिति का सामना करने में प्रधानमंत्री के नेतृत्व की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने सरकार के उन अत्‍यंत सक्रिय उपायों की भी सराहना की जो वायरस को फैलने से रोकने में काफी प्रभावकारी साबित हो रहे हैं। इन संगठनों ने ‘पीएम केयर्स फंड’ में अपना योगदान देने का संकल्‍प व्‍य‍क्‍त किया। इसके साथ ही इन संगठनों ने कहा कि उनके कार्यबल संकट की इस घड़ी में राष्ट्र की सेवा के लिए पूरी तरह से समर्पित होंगे। इन संगठनों ने चुनौती से निपटने के लिए वर्तमान में उनके द्वारा किए जा रहे विभिन्‍न कार्यों के बारे में भी बताया जिनमें डिजिटल माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाना, जरूरतमंद लोगों के बीच आवश्यक वस्तुओं, खाद्य पदार्थों के पैकेटों, सैनिटाइजर एवं दवाओं का वितरण करना और चिकित्सीय मदद देना शामिल हैं।


  प्रधानमंत्री ने जागरूकता बढ़ाने, बुनियादी आवश्यकताओं की व्यवस्था करके गरीबों एवं जरूरतमंदों की मदद करने एवं चिकित्सीय मदद देने के साथ-साथ अपने स्वयंसेवकों को को‍विड-19 से संक्रमित लोगों की सेवा के लिए समर्पित करने के महत्व को दोहराया। उन्होंने चिकित्सीय एवं वैज्ञानिक परामर्श देने और भ्रामक सूचनाओं से निपटने के महत्व पर विशेष बल दिया। प्रधानमंत्री ने इस महामारी की चुनौती का सामना करने के लिए निरंतर एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया।


  प्रधानमंत्री के सलाहकार और नीति आयोग के सीईओ ने भी इस विचार-विमर्श में भाग लिया।


प्रधानमंत्री ने भारतीय उच्‍चायोगों के प्रमुखों के साथ वीडियो कॉन्‍फ्रेंस की...

संवाददाता : नई दिल्ली


      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया भर में भारत के दूतावासों और उच्चायोगों के प्रमुखों के साथ शाम 5 बजे एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की। यह कॉन्‍फ्रेंस - दुनिया भर में भारतीय मिशनों के लिए इस तरह का पहला आयोजन था – जिसे वैश्विक कोविड-19 महामारी की प्रतिक्रियाओं पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया था।


प्रधानमंत्री ने कहा कि असाधारण समय के लिए असाधारण समाधान की आवश्यकता होती है, यही वजह है कि वैश्वीकरण के इस युग में भी, दुनिया के अधिकांश लोगों ने खुद को अलग कर लिया था। इस महामारी से लड़ने के लिए यह एक अपरिहार्य कदम था, लेकिन इसके बहुत अधिक परिणाम निकलने थे, क्योंकि वैश्विक प्रणाली के बंद होने का अंतर्राष्ट्रीय परिवहन प्रणाली, वित्तीय बाजारों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक और दूरगामी प्रभाव पड़ा है।



प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस महामारी पर अपनी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हुए इस साल जनवरी के मध्य से अभूतपूर्व और शुरुआती कदम उठा लिए थे, ताकि संक्रमण के बाहर से आने के जोखिम को कम किया जा सके, और उसके बाद महामारी को फैलने से रोका जा सके। इसमें दुनिया का सबसे बड़ा क्‍वारंटीन और लॉक डाउन शामिल है, जिसे भारत ने लागू किया है।


प्रधानमंत्री ने कुछ संकटग्रस्‍त क्षेत्रों में विदेश में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए किए गए प्रयासों के लिए मिशनों के प्रमुखों की सराहना की। उन्होंने पांच विशिष्ट बिन्दुओं पर कदम उठाने के लिए उन्हें प्रेरित किया:


i. अपना स्‍वास्‍थ्‍य और सुरक्षा सुनिश्चित करें, साथ ही अपनी टीम और परिवार की सुरक्षा का भी ध्‍यान रखें;


ii. अंतरराष्ट्रीय यात्रा प्रतिबंधों की अनिश्चितता को देखते हुए, विभिन्न देशों में फंसे भारतीयों पर ध्‍यान दिया जाए। उन्होंने भारतीय मिशनों के प्रमुखों का आह्वान किया कि वे विदेश में फंसे हमवतन लोगों के मनोबल को बढ़ाने में मदद करें, और विदेशों में उनके अनियोजित प्रवास से उत्पन्न मुद्दों के समाधान में मेजबान सरकारों के साथ मदद करें, और भारतीयों को विदेश में जिन अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, उनका समाधान करें, जिसमें जहां आवश्यक और संभव हो; आश्रय की व्यवस्था करना शामिल है,


iii कोविड​​-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई में सतर्क रहें और सर्वोत्तम प्रथाओं, नवाचारों, वैज्ञानिक सफलताओं और चिकित्सा उपकरणों की खरीद के स्रोतों को अपने देशों में स्‍वीकृति प्रदान करें। उन्होंने मिशन के प्रमुखों को विदेशों से चंदा जुटाने के लिए नव-स्थापित प्रधानमंत्री संरक्षण कोष को उपयुक्त तरीके से प्रचारित करने की सलाह दी।


iv. चूंकि यह संकट अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डालता है, पीएम ने मिशन के प्रमुखों को सलाह दी कि वे विदेशी भागीदारों के साथ अपने समन्वय के माध्यम से आवश्यक आपूर्ति, रसद श्रृंखला, प्रेषण पर ध्यान केंद्रित करें;


v. अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक स्थिति विकसित करने के लिए करीब से ध्यान देना जारी रखें, खासतौर से कोविड-19 महामारी के संदर्भ में।



जवाब में, बीजिंग, वाशिंगटन डीसी, तेहरान, रोम, बर्लिन, काठमांडू, अबू धाबी, काबुल, माले और सियोल स्थित उच्‍चायोगों के दस प्रमुखों ने प्रधानमंत्री और बाकी दर्शकों को अपने दृष्टिकोण की जानकारी दी। उन्होंने इस महामारी का मुकाबला करने के लिए भारत द्वारा उठाए गए दृढ़ उपायों को अपने देशों में स्‍वीकृति प्रदान करते हुए उसकी सराहना की।


मिशनों के प्रमुखों ने विदेश में फंसे भारतीयों, विशेष रूप से, छात्रों और श्रमिकों की मदद करने के अपने प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, प्रौद्योगिकियों, अनुसंधान और अन्य उपायों को स्‍वीकृति देने के प्रयासों की भी जानकारी दी, जो इस महामारी से लड़ने के भारत के राष्ट्रीय प्रयासों में मदद कर सकते हैं।


कोविड-19 के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में मिशन के प्रमुखों ने अन्य देशों से सीखे गए सबक, और उनके सर्वोत्तम तरीकों की भी जानकारी दी। हमारे पड़ोस में, मिशन के प्रमुखों ने कोविड -19 का मुकाबला करने के लिए सार्क देशों के लिए भारत की पहल पर बनाई गई विशेष निधि का उपयोग करते हुए सहायता करने के उपायों को रेखांकित किया। मिशन के प्रमुखों ने उनके काम के लिए प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और प्रेरणा के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।


अंत में, प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विदेश में भारत के उच्‍चायोग घर से बहुत दूर हो सकते हैं, लेकिन वे कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई में पूर्ण भागीदार बने हुए हैं। उन्होंने जोर दिया कि सभी भारतीयों की एकता और सतर्कता राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित रखने में मदद करेगी।


ताकतवर लोकतंत्र के मुखिया ट्रंप और मोदी कि दोस्ती का नया अंदाज..

हरि सिंह रावत @ नई दिल्ली


      अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि उनकी सफलता का राज हमेशा बड़ा सोचने की उनकी आदत है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं ज्यादा बड़ा सोचकर कामयाबी हासिल कर लेते हैं।  दुनिया के सबसे ताकतवर लोकतंत्र के मुखिया ट्रंप और सबसे ज्यादा आबादी वाले लोकतंत्र की अगुआई करने वाले मोदी ने अहमदाबाद में दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम में टीवी पर सीधे प्रसारित हो रहे सार्वजनिक कार्यक्रम में एक-दूसरे को गले लगाया तो वहां मौजूद 1,30,000 लोगों की तालियों की गडग़ड़ाहट की गूंज न सिर्फ पूरे भारत में, बल्कि अमेरिका और दुनियाभर में सुनी गई। 


ट्रंप भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा पर आए थे और उनके सम्मान में बड़े करीने से आयोजित शानदार स्वागत समारोह से जो संदेश निकला, उसकी प्रभावी ढंग से व्याख्या आधिकारिक संयुक्त बयानों के दस्तावेजी पृष्ठों में नहीं की जा सकेगी।  भारत और अमेरिका ने अपने आपसी संबंधों को बहुत मजबूत किया है जिसे अब व्यापक वैश्विक सामरिक भागीदारी कहा जा रहा है। ट्रंप की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा कई मायनों में मोदी की बेमिसाल, अत्यधिक व्यक्तिगत शैली वाली कूटनीति और व्यावहारिक तथा निर्णायक विदेश नीति की जीत थी, बकौल विदेश मंत्री एस. जयशंकर, जिसकी वकालत मोदी भारत को 'दक्षिण (विकासशील देशों) के ध्वजवाहक' के रूप में स्थापित करने के लिए करते रहे हैं. 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही मोदी ने अपनी उस ख्वाहिश को एक कला के रूप में बदल दिया है। 



ट्रंप ने मोदी को न केवल 'असाधारण और शानदार नेता और एक सच्चा दोस्त' बताया, बल्कि यह भी कहा, ''भारत एक जबरदस्त खिलाड़ी बनने जा रहा है और यह पहले से ही उस दिशा में चल पड़ा है. समस्याओं को सुलझाने और इस अतुल्य क्षेत्र में शांति को बढ़ावा देकर क्षेत्र का बेहतर भविष्य संजोने में आपकी जिम्मेदारी ज्यादा बड़ी है और आप एक महत्वपूर्ण नेतृत्व की भूमिका निभा सकते हैं.''ट्रंप के साथ बर्ताव भारत के लिए मुश्किल सवाल रहा है और जैसा कि इस यात्रा ने दिखाया, मोदी ने भारत-अमेरिका संबंधों को उचित दिशा दी है। जनवरी 2017 से राष्ट्रपति की कुर्सी पर आसीन ट्रंप दुनिया के लिए 'डिस्ट्रप्टर इन चीफ' या प्रमुख व्यवधानकारी साबित हुए हैं, जिन्होंने अमेरिका की अटलांटिक और प्रशांत महासागरों के पार साझेदारियों की नींव हिलाकर रख दी है, वैश्विक संस्थानों और समझौतों के प्रति नाममात्र का सम्मान दिखाया है, दुनिया के दारोगा के रूप में अमेरिका की भूमिका को कम करते हुए उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के अपने सहयोगियों को असहज किया है और चीन के खिलाफ व्यापारिक जंग छेड़ दी है। 


भारत सहित दुनियाभर के नेताओं ने मनमौजी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ बर्ताव में दिक्कत महसूस की है, क्योंकि उनका व्यवहार अप्रत्याशित है. उनकी नेतृत्व शैली रूखी, दादागीरी वाली और घमंड से भरी हुई है और उनके मन में हमेशा अमेरिका के व्यापार असंतुलन को ठीक करने की धुन सवार रहती है जिसे वे ऐतिहासिक भूल मानते हैं और हमेशा विजेता ही होना चाहते हैं। भारत के साथ ट्रंप का रुख कभी गरम तो कभी नरम रहा है. जून 2017 में व्हाइट हाउस में अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक में उन्होंने मोदी का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। 

इस बीच, ट्रंप की कट्टर विश्व दृष्टि की वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मौजूदा संरचना में बड़ा परिवर्तन आया. भारत और अन्य देशों का इससे मुकाबला हुआ, जैसा कि शशि थरूर और समीर सरन अपनी नई पुस्तक द न्यू वर्ल्ड डिसऑर्डर में जिक्र करते हैं। वैश्वीकरण और उदारवादी विश्व व्यवस्था की बातें पीछे छूट गईं, और एक दबंग और संकीर्ण विचारों वाले राष्ट्रवाद का नाटकीय रूप से पुनरुत्थान होने लगा। ट्रंप ने न केवल संयुक्त राष्ट्र और विश्व व्यापार संगठन सहित मौजूदा विश्व व्यवस्था के संस्थागत ढांचे की अवहेलना की, उन्होंने प्रमुख मुद्दों पर एकतरफा कार्रवाई को भी प्राथमिकता दी जिससे यूरोप, जापान और अन्य अमेरिकी सहयोगी बहुत हद तक असहज महसूस करने लगे। 

नई विश्व व्यवस्था अगर वास्तव में बहुध्रुवीय होनी है, तो भारत को भी एक महत्वपूर्ण शक्ति बनना पड़ेगा. इसके लिए, मोदी फ्रंट फुट पर बल्लेबाजी करने के लिए तैयार थे और भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह, विकल्पों और कद का विस्तार करने में आगे ले जा रहे थे। गुटनिरपेक्ष होने की बजाए, भारत ने बदले हुए अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में विभिन्न ध्रुवों के साथ सामंजस्य की स्थिति में होना चुना, बेशक, भारत नेहरूवादी युग से प्रस्थान की नीति पर बढ़ा लेकिन जिस उत्साह के साथ भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी सक्रियता बढ़ाई वह उस दौर की यादें ताजा कर रही थी। इस तरह मोदी सितंबर 2019 में व्लादिवोस्तक में पुराने दोस्त व्लादिमीर पुतिन के साथ गले मिले तो उसके कुछ हक्रतों के भीतर ही वे टेक्सास के ह्यूस्टन की 'हाउडी मोदी' रैली में भारतीय-अमेरिकियों से खचाखच भरे हॉल में ट्रंप के साथ खड़े थे। उसके बाद उन्होंने चीन से गंभीर मतभेदों के बावजूद तमिलनाडु के ममल्लापुरम के समुद्र तट पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मेजबानी भी की। 

फिर भी, भारत को यह अच्छी तरह से पता था कि चीन के उदय के साथ, अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना अत्यावश्यक है। जब व्यापार को लेकर मतभेदों के कारण ट्रंप ने संबंधों को तोडऩे की धमकी दी, तो मोदी और उनकी विदेश मामलों की टीम ने उसे वापस ठीक करने के लिए दो मोर्चों पर काम करना शुरू कर दिया। इस दिशा में एक बड़ा कदम मोदी के दोबारा चुनकर आने के बाद मई 2019 में जयशंकर को विदेश मंत्री के रूप में नियुक्त करना रहा, जिनकी विशेषज्ञता को मोदी ने सराहा है और मंत्रिमंडल के सहयोगी रूप में बहुत भरोसा करते हैं। 

इस बीच, अपने सशस्त्र बलों की कमान संरचना का एक रणनीतिक पुनर्गठन करते हुए, अमेरिका ने अपने अमेरिकी पैसिफिक कमान को अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमान का नाम दिया और इसके अधिकार क्षेत्र को न केवल हॉलीवुड से बॉलीवुड तक बल्कि हिंद महासागर के अफ्रीका के पूर्वी तटों पर स्थित देशों तक बढ़ाया. इस तरह भारत हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री डकैती को रोकने के लिए अपने समुद्री जहाजों को तैनात करने और बचाव कार्यों में शामिल होने के साथ ही महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार लिंक को मुक्त और शांतिपूर्ण रखने में योगदान देने वाले एक पूर्ण सुरक्षा प्रदाता के रूप में उभरा। 

हालांकि, श्रीलंका, मालदीव, म्यांमार, नेपाल और बांग्लादेश की परियोजनाओं में चीन का बढ़ता निवेश भारत के लिए चिंता का विषय है. चीन की तरह समृद्ध नहीं होने के कारण भारत ने इन देशों की केवल उन परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया है जो संपर्क बनाने और विस्तार करने में मदद करेंगी। 2014 से, 142 परियोजनाएं शुरू की गई हैं और इसमें से 52 को पूरा किया जा चुका है। ये श्रीलंका में कोलंबो-मटारा राजमार्ग को विकसित करने से लेकर बांग्लादेश के साथ 1965 के पूर्व के छह सीमा पार रेल लिंक को बहाल करने और नेपाल में छह सीमा पार रेल लिंक प्रदान करने तक सीमित हैं। 


कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम ने किया बाल सम्प्रेषण गृह का निरीक्षण...

प्रजा दत्त डबराल @ नई दिल्ली


       सोमवार की सुबह, दिल्ली के महिला एवं बाल विकास मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने विभाग के तहत आने वाले बाल सम्प्रेषण गृह का निरीक्षण किया। 

 

कोरोना जैसी महामारी से बचने और उसे फैलने से रोकने के लिए सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करना ज़रूरी है। इसी का जायज़ा लेने के लिए मंत्री  राजेंद्र पाल गौतम ने बाल सम्प्रेषण गृहों के लिए जारी किए सख्त निर्देश।

 


राजेंद्र पाल गौतम ने यह सुनिश्चित किया कि लॉकडाउन के नियमों का पूरी तरह से पालन हो। इसके लिए बाल सम्प्रेषण गृह में परिजनों के आने पर पाबंदी लगाई गई। बच्चे व युवा अपने परिजनों से हफ्ते में दो बार फोन से संपर्क कर सकेंगे जो पहले केवल एक ही बार होती थी। बाहर से कोई संपर्क नही हो, इसका खास ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने ने साफ सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।

 


 

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कोरोना से बचने का एक ही उपाय है वह है कि इसके संक्रमण को पूरी तरह से रोका जाए। इसको मद्दे नजर रखते हुए आज से ही लोगों के आने जाने पर नियंत्रण किया जाए। जो भी आएगा वह गेट पर रखें सैनिटाइजर से अपने हाथ सैनिटाइज करके ही

 

अंदर आ सकता है। सोशल डिस्टेंस बनाए रखने का सख्ती से पालन हो। यहां रह रहे सभी बच्चों और युवाओं के स्वास्थ्य को प्रथिकमकिता दी जाएगी, यह सभी बच्चे और युवा सरकार की जिम्मेदारी है। इसको मद्देनजर रखते हुए ही यह निर्देश जारी किए जा रहे हैं।

 

दिल्ली गेट स्थित 75 लोगों की क्षमता वाले ऑब्जर्वेशन होम में फिलहाल 29 युवा है जिसमें से 6 युवाओं को जमानत पर छोड़ दिया गया। इसी तरह 100 युवाओं की क्षमता वाले ऑब्जर्वेशन होम में 103 संवासी है, जिसमें से 24 को जमानत पर रिहा कर दिया और 2 शाम तक छोड़ दिए जाएंगे। 50 की क्षमता वाले प्लेस फॉर सेफ्टी मजनू का टीला में 65 युवा है, जिसमें 9 को जमानत दे दी गई। 

 

SPYM सेवा कुटीर जहां 40 युवा है, जिसमें 10 को जमानत पर छोड़ दिया गया।


सोमवार, 30 मार्च 2020

मुक्तिधाम स्वच्छता टीम के द्वारा,लाक डाउन में सेवा करने वालों को बांटी जा रही निःशुल्क चाय व बिस्किट...

संवाददाता @ संदीप सिंह ठाकुर, मुंगेली छत्तीसगढ़


      मुंगेली जिले के लोरमी में मुक्तिधाम स्वच्छता टीम के सदस्यों द्वारा चौक-चौराहों पर अपनी सेवा देते हुए स्वयंसेवी सदस्यों एवं शासकीय कर्मियों को निःशुल्क चाय व बिस्किट का वितरण सुरक्षित तरीके से किया जा रहा है।



इस लाकडाउन के बीच मुक्तिधाम स्वच्छता टीम के द्वारा प्रतिदिन सुबह 11:00 बजे नगर के विभिन्न चौक चौराहों में अपनी सेवा देने वाले सिविल वॉलिंटियर्स, शासकीय कर्मचारी एवं विभिन्न कार्यालयों में कार्य करने वाले कर्मचारियों को निःशुल्क चाय वितरित करने का निर्णय लिया गया।


इसके अंतर्गत प्रतिदिन नगर के विभिन्न चौराहों में तैनात वॉलिंटियर्स शासकीय कर्मचारी व लोरमी थाना, जनपद पंचायत कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस कार्यालय में चाय और 50 बिस्तर अस्पताल में कर्मचारियों व  मरीजों को भी चाय बिस्किट का वितरण किया गया। टीम के सदस्यों ने बताया कि प्रतिदिन इसी तरह चाय वितरण किया जाएगा। इस सेवा कार्य में पवन अग्रवाल, शरद डड़सेना , शैलेंद्र जायसवाल, आशीष जायसवाल, नंदलाल खत्री, आशीष डड़सेना, परमेश वैष्णव, सावन डड़सेना सहित अन्य सदस्य अपनी भूमिका निभा रहे हैं।



वहीं लाकडाउन के दौरान लोरमी थाने में पदस्थ पुलिसकर्मी यशवंत डाहिरे के द्वारा 30 किलो चावल का दान किया गया। पुलिसकर्मी द्वारा प्रदत्त चांवल को लोरमी हाईस्कूल में साइकिल वितरण कार्य हेतु आए हुए, अन्य प्रदेश के श्रमिकों को दान किया गया। ये श्रमिक स्कूलों में वितरित होने वाले साइकिल फिटिंग कार्य के लिए लोरमी आए थे और धारा 144 लागू होने के कारण लोरमी में ही रहने को मजबूर हो चुके हैं।



लोरमी एसडीओपी कादिर खान और खुड़िया चौकी प्रभारी चिंतामणी मालाकार द्वारा निःशुल्क मास्क वितरण किया...

संवाददाता @ संदीप सिंह ठाकुर,मुंगेली छत्तीसगढ़


      कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप पर काबू पाने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा 21 दिनों का लॉकडाउन घोषित किया गया है ।



वहीं मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड अंतर्गत अचानकमार टाइगर रिजर्व के वनग्राम मंजूरहा, चकदा सहित कई अन्य गांवों का भ्रमण करते हुए राष्ट्रपति दत्तक पुत्र कहे जाने वाले दर्जनभर बैगा आदिवासी परिवार के लोगों को लोरमी एसडीओपी कादिर खान और खुड़िया चौकी प्रभारी चिंतामणी मालाकार व अन्य स्टाफ के कर्मचारियों द्वारा निःशुल्क मास्क वितरण किया गया । 


इस दौरान पुलिस अधिकारी ने ग्रामीणों को कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए साबुन से हाथों को धोने, मास्क का उपयोग करने, अनावश्यक घरों से बाहर नही निकलने, गले मे खराश, खांसी और बुखार होने पर तत्काल स्वास्थ्य परीक्षण कराने और सभी नियमों का पालन करने सचेत किया । वहीं इस मौके पर एसडीओपी ने ग्रामीणों  को धारा 144 का कड़ाई से पालन करने अपील की। 



मुख्यमंत्री ने लोगों से अपना स्थान नहीं छोड़ने का आग्रह किया...

संवाददाता : शिमला हिमाचल


      मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने प्रदेश के भीतर और अन्य राज्यों में फंसे हिमाचलवासियों से आग्रह किया है कि वे जहां हैं, वहीं बने रहें, क्योंकि राज्य सरकार ने कोरोना वायरस के दृष्टिगत अन्तरराज्यीय और राज्य के अन्दर वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा रखी है।


मुख्यमंत्री ने आज उपायुक्तों के साथ वीडियो काॅंफ्रेंस के माध्यम से बातचीत के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले और राज्य के बाहर लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए। जो लोग पहले ही राज्य में प्रवेश कर चुके हैं उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थ्तापित क्वारन्टिन केन्द्रों में रखा जाए। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जो लोग विभिन्न स्थानों पर फंसे हुए हैं उनके लिए भोजन और ठहरने की उचित व्यवस्था की जाए।



उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन यह सुनिश्चित बनाए कि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारू रूप से बनी रहे। उन्होंने कहा कि फंसे हुए लोगों की सुविधा के लिए स्कूलों और डाइट भवनों में बनाए गए कैम्पों में स्वच्छता का विशेष रूप से ध्यान रखा जाए।


जय राम ठाकुर ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि वे फंसे हुए लोगों को उसी स्थान पर बने रहने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इन लोगों की हर संभव सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के बाहर से और प्रदेश के एक जिले से दूसरे जिले में आए लोगों की पहचान करने के कार्य में पंचायती राज संस्थानों की सहायता ली जाए।


उन्होंने कहा कि दिल्ली और चण्डीगढ़ में फंसे हिमाचलवासियों की सुविधा के लिए नई दिल्ली और चण्डीगढ़ स्थित हिमाचल भवनों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं। हिमाचल भवनों में इन लोगों को भोजन और ठहरने की सुविधा प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास किए जायेंगे।


मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची ने उपायुक्तों से कहा कि लोगों के एक जिले से दूसरे जिले और बाहरी राज्यों से निर्गमन पर पूर्ण रोक लगाई जाए। इसके अतिरिक्त श्रमिकों और अन्य राज्यों के कर्मियों को भी प्रदेश के बाहर जाने के लिए नहीं कहा जाए और उन्हें शिविरों में ही रखा जाए।


पुलिस महानिदेशक एस.आर. मरडी ने कहा कि किसी भी अन्य राज्य से लोगों को लेकर आने वाले वाहनों को हिमाचल प्रदेश में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।


अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार और आर.डी. धीमान तथा सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के निदेशक हरबंस सिंह ब्रसकोन भी बैठक में शामिल थे।


गर्भवती महिलाओं की ट्रेकिंग करें, सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित कराएं : मुख्यमंत्री

संवाददाता  : जयपुर राजस्थान


      मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विभिन्न जिलों में गर्भवती महिलाओं की ट्रेकिंग कर प्रसव की संभावित तारीख (डिलीवरी डेट) की जानकारी जुटाई जाए और तय तारीख पर प्रसव के लिए समुचित व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि आईसोलेशन, क्वारंटाइन अथवा ट्रांजिट शिविरों में रह रही ऎसी महिलाओं की विशेष देखभाल की जाए। वर्तमान माहौल में सभी गर्भवती महिलाओं के प्रति जिम्मेदारी में राज्य सरकार कोई कोताही नहीं होने देगी। 

 


 

गहलोत ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्थिति की नियमित समीक्षा बैठक में कहा कि राज्य सरकार को समाज के सभी जरूरतमंद और वंचित वर्गाें के प्रति अपनी जिम्मेदारी का पूरा निर्वहन करना है। ऎसे में, गरीब तबके की गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित गर्भ, टीकाकरण और प्रसव से जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस काम में महिला चिकित्सकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अलावा राज्य सरकार में पदस्थापित महिला अधिकारियों-कर्मचारियों, जो स्थानीय निवासी हैं, की भी मदद ली जा सकती है। 

 

सरकारी कार्मिक वॉलंटियर बनें, स्थानीय प्रशासन का सहयोग करें

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कलक्टर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत स्थानीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भी सूचियां तैयार करें और उनको कोविड-19 महामारी से जुड़े विभिन्न अभियानों में वॉलंटियर के रूप में भूमिका निभाने के लिए नियोजित करें। इन कार्मिकों से मुख्यतः बेघर लोगों, वंचितों एवं जरूरतमंदों के लिए भोजन और खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने का काम लिया जा सकता है। ये वॉलंटियर कोई परेशानी आने पर जिला स्तर पर स्थित वॉर रूम में सूचना कर मदद कर सकते हैं और स्थानीय प्रशासन भी आवश्यकता होने पर उनकी सेवाएं ले सकता है। 

 

प्रवासियों की सहायता के लिए अधिकारी नियोजित

गहलोत ने इस संकट काल में विभिन्न प्रदेशों में मौजूद प्रवासी राजस्थानियों और राजस्थान में रह रहे दूसरे राज्यों के निवासियों के सामने आने वाली विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए संबंधित राज्यों से समन्वय के लिए दो वरिष्ठ अधिकारियों को नियोजित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि ये अधिकारी दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्री कार्यालयों और मुख्य सचिव कार्यालयों से निरंतर सम्पर्क में रह कर प्रवासियों को होने वाली समस्याओं का समाधान करवाने में मदद करेंगे। 

 

निजी संस्थाओं ने संसाधनों के उपयोग के प्रस्ताव दिए

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की कई निजी संस्थाओं और उपक्रमों ने अपने संसाधनों, भवनों आदि को कोरोना से निपटने के लिए सरकार द्वारा उपयोग में लेने के लिए प्रस्ताव दिए हैं। उन्होंने ऎसे सभी प्रस्तावों के लिए संबंधित संस्थाओं एवं व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि इन संसाधनों की सूची तैयार की जा रही है तथा आवश्यकता पड़ने पर इन्हें उपयोग में लिया जाएगा। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान सभी लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए बेहतर काम करने वाले पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को साधुवाद दिया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक से कहा कि वे स्वयं फील्ड में अच्छा काम करने वाले पुलिस कार्मिकों की हौसला अफजाई करें, ताकि दूसरे लोग भी उनसे प्रोत्साहित हों।

 

बैठक में मुख्य सचिव डीबी गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह राजीव स्वरूप और पुलिस महानिदेशक भूपेन्द्र सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। 

राज्यपाल के निर्देशन में विश्वविद्यालय चला रहे कोरोना के विरूद्ध अभियान...

संवाददाता : भोपाल मध्यप्रदेश


      राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देशन में प्रदेश के सभी शासकीय विश्वविद्यालय विश्वव्यापी कोरोना संकट से निपटने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोरोना वायरस के संबंध में उपलब्ध कराई गई अधिकृत जानकारी के प्रचार-प्रसार में इन विश्वविद्यालयों द्वारा सोशल नेटवर्किग साइट्स का उपयोग किया जा रहा है। विश्वविद्यालयों द्वारा विद्यार्थियों को अभी तक व्हाट्सएप, एसएमएस और ई-मेल द्वारा 17 लाख 55 हजार से अधिक संदेश भेजे गए है। छात्र-छात्राओं को कोरोना वायरस से बचाव के संबंध में भी सूचित और शिक्षित किया गया है।



राज्यपाल के सचिव मनोहर दुबे ने बताया कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र प्रभावी तरीका है। इस संबंध में छात्र-छात्राओं को स्वयं इसका पालन करने और दूसरों को पालन कराने के लिये प्रेरित करने के प्रयास विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए हैं।


इस कार्य में आधुनिक संचार सुविधाओं का उपयोग करते हुए विद्यार्थियों को एसएमएस के द्वारा 14 लाख 28 हजार 653, व्हाट्सअप से 1 लाख 15 हजार 790 और ईमेल के माध्यम से 2 लाख 10 हजार 596 संदेश भेजें गए है। उन्होंने बताया कि संदेशों में घर पर ही रहने, सामाजिक दूरी बनाए रखने, हाथों को धोते रहने सहित अन्य जानकारियाँ दी गई है।


राज्यपाल टंडन ने विगत 25 मार्च को विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को विडियो कॉन्फ्रेंस में लॉक डाउन के दौरान कोरोना वायरस संकट से बचाव के लिए जन-जागृति के कार्य करने को निर्देशित किया था। विश्वविद्यालयों द्वारा 48 घंटे के अन्दर राज्यपाल के निर्देशों के पालन में 17 लाख 55 हजार 39 संदेश छात्र-छात्राओं को भेजे गये हैं।


‘बिजनेस इम्युनिटी प्लेटफॉर्म’ वेबसाइट पर एक सप्ताह में 1.75 लाख से भी अधिक विजिटर...

संवाददाता : नई दिल्ली


      वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीनस्‍थ भारत की राष्ट्रीय निवेश संवर्धन और सुविधा एजेंसी  ‘इन्वेस्ट इंडिया’ की वेबसाइट पर उपलब्‍ध द इन्वेस्ट इंडिया बिजनेस इम्युनिटी प्लेटफॉर्म एक व्यापक संसाधन के रूप में चौबीसों घंटे काम कर रहा है, जिससे कारोबारियों तथा निवेशकों को भारत में ‘कोविड-19 (कोरोना वायरस)’ से निपटने के लिए उठाए जा रहे ठोस कदमों पर वास्तविक समय में नवीनतम जानकारियां (अपडेट) प्राप्‍त होने में मदद मिल रही है।


21 मार्च, 2020 को लॉन्‍च किए गए इस प्‍लेटफॉर्म पर प्रात: 10 बजे तक 50 से ज्‍यादा देशों के 1.75 लाख से भी अधिक विजिटर आ चुके हैं। इस वेबसाइट पर 205 ब्लॉग, इन्फोग्राफिक्स, वीडियो और अन्‍य आवश्‍यक सामग्री के साथ-साथ 423 सरकारी एडवाइजरी और अधिसूचनाएं भी हैं। इस वेबसाइट पर सर्वाधिक सर्च किया गया शब्द ‘कोविड के लिए दान’ था।



बिजनेस इम्युनिटी प्लेटफॉर्म (बीआईपी) दरअसल कारोबार से जुड़े मुद्दों को सुलझाने वाला एक सक्रिय प्लेटफॉर्म है, जहां संबंधित सेक्‍टर के विशेषज्ञों की एक टीम जल्द से जल्द प्रश्नों का उत्तर देती है। इन्वेस्ट इंडिया ने एमएसएमई (सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम) के प्रश्नों का जवाब देने और उनके मुद्दों को सुलझाने के लिए सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) के साथ साझेदारी करने की भी घोषणा की है।


    यह गतिशील और निरंतर अद्यतन या अपडेट किए जाने वाला प्लेटफॉर्म वायरस से जुड़े घटनाक्रमों पर नियमित रूप से पैनी नजर रखता है, केंद्र एवं राज्य सरकारों की विभिन्न पहलों के बारे में नवीनतम सूचनाएं प्रदान करता है, विशेष प्रावधानों या सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करता है, और ईमेल के जरिए तथा व्हाट्सएप पर प्रश्नों का उत्तर देता एवं मुद्दों को सुलझाता है। इस पर अब तक कारोबार में आवश्‍यक सहयोग देने से जुड़े 845 प्रश्‍न प्राप्‍त हुए हैं, जिनमें से 614 मुद्दों को पहले ही सुलझाया जा चुका है। ये सवाल मुख्‍यत: लॉजिस्टिक्स, अधिसूचनाओं, सीमा शुल्क से जुड़े मुद्दों, संयंत्रों को बंद करने और दिए गए विभिन्‍न स्पष्टीकरणों के बारे में थे।


   बीआईपी ने स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल से संबंधित आवश्यक आपूर्ति या वस्‍तुओं को खरीदने के लिए ‘ज्‍वाइनिंग द डॉट्स’ अभियान शुरू किया है। यह कोविड-19 का सामना करने के लिए आवश्यक उपकरणों की मांग एवं आपूर्ति में अंतर को पूरा करने के लिए विकल्‍पों की सुविधा भी प्रदान कर रहा है। इसकी हितधारक पहुंच कोशिशों से लगभग 2000 वैश्विक और घरेलू कॉरपोरेट तथा हितधारकों से संपर्क करना संभव हो पाया है। इस वेबसाइट पर ‘स्टार्टअप चुनौती: कोविड-19 से निपटने के लिए समाधान’ पर 17 राज्यों से 120 से भी अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।


इसने अमेरिकी वित्तीय सेवा कंपनियों के साथ विशेष सम्मेलन का आयोजन किया, जिस दौरान देश में लॉकडाउन के कारण कारोबार की निरंतरता सुनिश्चित करने से जुड़े मुद्दों की पहचान करने और समाधान पर फोकस किया गया। ‘कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप के बीच स्‍टार्टअप्‍स के कारोबार में निरंतरता’ विषय पर उद्योग जगत के दिग्गजों और अन्य हितधारकों के पैनल के साथ ‘वेबिनार’ का आयोजन किया गया है।


कोविड-19 के दौरान ‘संभावित वित्‍तपोषण और सहयोग: स्टार्टअप्स के लिए अवसर’ और ‘घर से ही ऑफि‍स का काम करने की ओर अग्रसर’ होने के मॉडल पर चर्चाएं हुईं। अमेरिका की लाइफ साइंसेज कंपनियों के साथ एक विशेष सम्मेलन का आयोजन किया गया, ताकि लॉकडाउन के दौरान उनके सामने उत्‍पन्‍न हुई समस्‍याओं और उनके निवारण के तरीकों पर चर्चा की जा सके।


अर्धसैनिक बलों ने एक दिन का वेतन प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दी...

प्रजा दत्त डबराल @ नई दिल्ली


      अर्धसैनिक बलों ने सदैव भारत की सुरक्षा और एकता के लिए अपना योगदान दिया है। COVID-19 से लड़ने के लिए प्रधानमंत्री के आवाहन पर सभी अर्धसैनिक बलों के जवानों ने अपने एक दिन का वेतन कुल योग 116 करोड़ प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दिया है।


प्रधानमंत्री ने अर्ध सैनिक बलों का तहे दिल से धन्यवाद किया और गृहमंत्री अमित शाह ने भी उनका आभार व्यक्त किया कि उन्होंने संकट के समय में देश वासियों के लिए अपना एक दिन का वेतन प्रधानमंत्री राहत कोष में दिया ।



 


‘मन की बात 2.0’ की 10वीं कड़ी में प्रधानमंत्री का संबोधन लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की अपील की...

संवाददाता : नई दिल्ली


      ‘मन की बात 2.0’ की 10वीं कड़ी के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कड़े फैसले लेने के लिए माफी मांगी और कहा कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में कड़े फैसले लेने की आवश्यकता थी।


उन्होंने कहा कि भारत के लोगों को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि साथ मिलकर भारत कोविड-19 को हरा देगा। लॉकडाउन लोगों और उनके परिवार को सुरक्षित रखेगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग ‘अलग-अलग रहने’ का पालन नहीं कर रहे हैं उन्हें मुसीबतें झेलनी पड़ सकती हैं।



आज “मन की बात” कार्यक्रम में अपने विचारों को साझा करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का खेद है कि लॉकडाउन के कारण लोगों विशेषकर गरीबों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने लोगों के लिए सहानुभूति व्यक्त की और कहा कि 130 करोड़ की आबादी वाले भारत जैसे देश में कोई अन्य विकल्प नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि कड़े फैसले लेने पड़े क्योंकि यह जीवन या मृत्यु का प्रश्न था और यह देखते हुए कि पूरी दुनिया किस दौर से गुजर रही है।


उन्होंने एक सूक्ति का उद्धरण दिया, “एवं एवं विकार अपि, तरुन्हा साध्यते सुखम।” इसका अर्थ है बीमारी और इसकी विपत्ति को शुरूआत में ही खत्म कर देना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब बीमारी असाध्य हो जाती है तो इसका इलाज मुश्किल हो जाता है। कोरोनावायरस ने दुनिया को बांध दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “यह ज्ञान, विज्ञान, अमीर, गरीब, सामर्थवान, कमजोर- सभी को चुनौती दे रहा है। यह किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं है और यह किसी क्षेत्र या मौसम का भी विभेद नहीं कर रहा है।”


प्रधानमंत्री ने इसे खत्म करने के संकल्प के साथ एकजुट होने के लिए पूरी मानवता का आह्वान किया क्योंकि इस वायरस से पूरी मानव जाति के विनाश का खतरा बन गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉकडाउन का पालन करना दूसरों की मदद करना नहीं बल्कि स्वयं को सुरक्षित रखना है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अगले कुछ दिनों तक अपने व अपने परिवार की सुरक्षा करें और लक्ष्मण रेखा का पालन करें।


प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग लॉकडॉउन का उल्लंघन कर रहे हैं क्योंकि वे मामले की गंभीरता को समझने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से लॉकडाउन का पालन करने की अपील की और कहा कि ऐसा नहीं होने पर हमें कोरोनावायरस की विपत्ति से अपने आप को बचाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने एक उक्ति का जिक्र किया, “आरोग्यम परम भाग्यम्, स्वास्थम् सर्वार्थ साधनम्।” इसका अर्थ है अच्छा स्वास्थ्य सबसे बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने बल देते हुए कहा कि दुनिया में खुशी का एक मात्र रास्ता अच्छा स्वास्थ्य है।


उपराष्ट्रपति की राज्य सभा के सदस्यों से कोविड 19 के विरुद्ध अभियान में सांसद निधि से योगदान देने की अपील...

संवाददाता : नई दिल्ली


      उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने राज्य सभा के सांसदों से सरकार द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्र व्यापी अभियान हेतु स्थापित कोष में, अपने सांसद निधि से कम से कम रू 1 करोड़ योगदान स्वरूप देने की अपील की है।


इस संदर्भ में सांसदों को लिखे अपने पत्र में उपराष्ट्रपति ने कहा  है कि कोविड 19 संक्रमण से पैदा हुए इस संकट से निपटने के लिए, सरकार, निजी क्षेत्र तथा नागरिकों द्वारा इस संक्रमण के विरुद्ध अनेक कदम उठाए गए हैं जिसके लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय, मानव संसाधनों और साजो  समान की आवश्यकता होगी जिसके लिए भारत सरकार विभिन्न तरीकों से जरूरी वित्तीय संसाधन एकत्र कर रही है जिससे केंद्र, राज्य तथा जिला स्तर तक पर्याप्त संसाधनों को उपलब्ध कराया जा सके।  


उन्होंने कहा कि इस दिशा में सांसदों की तत्परता भारत सरकार द्वारा इस संक्रमण के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में महत्वपूर्ण योगदान होगा। उपराष्ट्रपति ने आग्रह किया वे वर्ष 2020-21 के लिए अपनी सांसद निधि में से कम से कम रू 1 करोड़ की राशि  केंद्र सरकार द्वारा नियत कोष में देने के लिए अपनी स्वीकृति इंगित करें।



उन्होंने कहा कि इसके लिए केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय द्वारा सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि ( MPLADS) से संबद्ध नियमों में, एक बार के लिए आवश्यक विशेष प्रावधान किए गए हैं।


उपराष्ट्रपति ने देशवासियों से भी अपील की कि वे आपदा प्रबंधन क्षमता को और सुदृढ़ करने के लिए, PM-CARE फंड में उदारतापूर्वक योगदान दें। 


 नागरिकों, समाज सेवी संस्थाओं तथा धार्मिक संगठनों के प्रयासों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन से अपील की कि वे स्थानीय स्तर पर ही दुर्बल वर्गों और जरूरतमंदों के लिए भोजन, आश्रय  की व्यवस्था करने में या अन्य कैसी भी सहायता से अपना यथासंभव योगदान करें। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पूर्ण पालन करें।


इससे पहले उपराष्ट्रपति ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, दोनों सदनों के महासचिवों के साथ इस विषय पर बैठक की तथा राज्य सभा के उपसभापति तथा राज्य सभा में विभिन्न दलों के नेताओं से सांसद निधि के विषय में चर्चा की।


11 हजार कैदियों को पैरोल पर छोड़ेगी,योगी सरकार...

संवाददाता : लख़नऊ उत्तरप्रदेश 


       कोरोना वायरस संक्रमण के खतरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। योगी सरकार राज्य के जेलों में बंद 11 हजार कैदियों को पैरोल पर छोड़ने जा रही है। सात साल से कम की सजा काट रहे प्रदेश के 71 जेलों में बंद इन कैदियों को आठ सप्ताह के लिए पैरोल पर छोड़ा जा रहा है।



इससे पहले राज्य सरकार ने प्रदेश के तमाम जेलों से 14 साल की सजा काट चुके और 60 साल से अधिक उम्र के कैदियों की लिस्ट मांगी थी।शुक्रवार को पंजाब सरकार ने भी 6 हजार कैदियों को पैरोल पर छोड़ने की घोषणा की थी। वहीं इससे पहले तिहाड़ जेल प्रशासन ने ऐसा ही ऐलान करते हुए कहा कि कोरोना वायरस के चलते अगले 3-4 दिनों में करीब 3 हज़ार कैदी छोड़े जाएंगे। जिसमें 1500 कैदी ऐसे हैं जिन्हें कोर्ट से अलग-अलग अपराधों में सज़ा हो चुकी है। इन्हें पैरोल या फरलो पर छोड़ा जाएगा जबकि करीब 1500 कैदी ऐसे हैं जो विचाराधीन यानी अंडर ट्रायल हैं, उन्हें अंतरिम जमानत देकर छोड़ा जाएगा।


दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि भारत में शुक्रवार से अब तक 2 मौतों के साथ कोरोना वायरस के 149 नए मामले सामने आए हैं। कोरोना वायरस के मामलों की संख्या देशभर में बढ़कर 873 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि कोरोना वायरस से अब तक जिन 19 लोगों की मौत हुई है, शुगर, हाईपरटेंशन, किडनी और रक्तचाप की जैसी बीमारियां थीं।


रविवार, 29 मार्च 2020

सभी सरकारी राशन दुकानों पर सातों दिन राशन मिलेगा : इमरान हुसैन

प्रजा दत्त डबराल @ नई दिल्ली


      खाद्य और नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री इमरान हुसैन ने कोरोना वायरस से उत्पन्न हुई स्थिति में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों को अप्रैल 2020 के महीने में 50 प्रतिशत बढ़ी हुई मात्रा में मुफ्त राशन प्रदान करने के लिए खाद्य और नागरिक आपूर्ति (एफएंडएस) विभाग और दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (डीएससीएससी ) द्वारा की गई तैयारियों की समीक्षा की। एफएंडएस विभाग और डीएससीएससी के वरिष्ठ अधिकारियों ने खाद्य मंत्री को बताया कि निर्धारित समयानुसार राशन 1150 एफपीएस दुकानों पर पहुंचना शुरू हो गया है और शेष एफपीएस पर राशन 29 मार्च 2020 से पहले पहुंच जाएगा। इसके अलावा, जहां राशन पहुंच गया है, वहां राशन वितरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

 

खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ने बताया कि कई विधायक उनके साथ नियमित संपर्क में हैं और वे सभी गरीब और जरूरतमंद लाभार्थियों को मुफ्त राशन के शीघ्र और सुविधाजनक वितरण के लिए तत्पर हैं। माननीय मंत्री ने सभी विधायकों और एफपीएस डीलरों से राशन प्राप्त करते समय निर्धारित सामाजिक दूरियों (सोशल डिस्टसिंग) के मानदंडों को बनाए रखने और लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की कठिनाई से बचने के लिए नियमित रूप से शिक्षित करने और मार्गदर्शन करने का अनुरोध किया। 

 

खाद्य मंत्री इमरान हुसैन ने लाभार्थियों से अपील की कि वे अपने हित में राशन प्राप्त करते समय सरकार के दिशानिर्देशों का निष्ठापूर्वक पालन करें। वे राशन दुकानों पर भीड़ लगाने से बचें, वे फेस मास्क पहनें और एफपीएस डीलरों, राशन कर्मचारियों और दिल्ली सरकार द्वारा विशेष रूप से सुचारू और परेशानी मुक्त राशन वितरण के लिए तैनात सिविल डिफेन्स वालंटियर्स के साथ सहयोग करें। माननीय मंत्री ने लाभार्थियों को आश्वस्त किया कि सभी के लिए राशन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और इसके लिए उन्हें राशन की दुकानों पर अनावश्यक भीड़ लगा कर अवयवस्था पैदा करने की आवश्यकता नहीं है। राशन सातों दिन बिना किसी साप्ताहिक छुट्टी एवं वयवधान के, सभी लाभार्थियों को मिलेगा। 

 


 

इमरान हुसैन ने सभी एफपीएस डीलरों और उनके सहायकों को निर्देश दिया कि लाभार्थियों को राशन वितरित करते समय वे फेस मास्क पहने और हैंड सैनिटाइज़र का उपयोग करें।

 

दिल्ली सरकार ने पहले ही अप्रैल, 2020 के महीने के लिए मुफ्त राशन (गेहूं और चावल) की आपूर्ति करने का फैसला किया है। अप्रैल 2020 महीने के लिए दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत प्रत्येक राशन लाभार्थियों को 5 किलोग्राम खाद्यान (4 किलो गेहूं और 1 किलो चावल) के स्थान पर 7.5 किलोग्राम खाद्यान्न (6 किलोग्राम गेहूं और 1.5 किलोग्राम चावल) प्रदान करने का निर्णय लिया है। ग़ौरतलब रहे कि दिल्ली सरकार ने अप्रैल 2020 के महीने के लिए एनएफएस राशन लाभार्थियों को अभी तक मिलने वाले खाद्यान में 50% की वृद्धि की है, अतः इस वृद्धि के बाद लाभार्थियों को अब 150 प्रतिशत खाद्यान मिलेगा। अप्रैल, 2020 के महीने के लिए यह बढ़ा हुआ राशन 2000 से अधिक राशन की दुकानों द्वारा सभी लाभार्थियों को निशुल्क वितरित किया जा रहा है।

 

खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतने की आवश्यकता है। उन्होंने दिल्ली के नागरिकों से दिल्ली सरकार द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करने की भी अपील की ताकि लोगों को कोविड-19 कोरोना वायरस से बचाया जा सके।

55 पार के पुलिस कर्मचारियों को मिली राहत...

संवाददाता : देहरादून उत्तराखंड 


      प्रदेश के सभी ज़िलों में 55 साल से ज्यादा उम्र के पुलिस कर्मियों को लॉकडाउन के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाकों में ड्यूटी ना कराई जाए। ज्यादा उम्र में कोरोना संक्रमण की आशंका ज्यादा होने के कारण पुलिस मुख्यालय ने ये निर्णय लिया है। डीजी कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने सभी जिला प्रभारियों को शुक्रवार को ये निर्देश दिए।कहा कि 55 साल के ऊपर की उम्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में इस उम्र के पुलिस कर्मियों की ऐसी जगह ड्यूटी ना लगाई जाए जहाँ वे ज्यादा लोगो के संपर्क में आएं। ऐसे पुलिसकर्मियों को दफ्तरों में तैनात किया जाए। ताकि वे भी इस संक्रमण से बचे रहें।



"कैसी लड़की है ये" प्रो.वीरेन्द्र सिंह नेगी की कलम से कहानी...

हिमालयी साहित्य खजाना श्रृंखला के अंतर्गत "कैसी लड़की है ये" प्रो.वीरेन्द्र सिंह नेगी की कलम से कहानी...


"कैसी लड़की है ये"


"दीदी फिर कब आओगी?" झिझकते और शरमाते हुए रम्मू ने पूछा।


"अब दोबारा क्यों आऊंगा! मैं तो हर बार नक्शे में एक नया देश खोजता हूं, अता पता पूछता हूं और चल देता हूं हर बार एक नई यात्रा पर।" गुड्डी ने अपने टॉमबॉय अंदाज में कहा।


सड़क से नीचे उतरते घुमावदार पगडंडी पर रम्मू चुपचाप आगे चलता हुआ सोच रहा है। 
"कैसी लड़की है ये"


अपनी पीठ पर रकशैक लटकाए हुए हाथ में स्टिक को लहराते हुए गुड्डी अपने दिन भर के ट्रैकिंग रोमांस को उछलते कूदते अभिव्यक्त करती हुई पीछे पीछे चल रही है। 


कुछ दिन पहले धारचूला से अर्जुन का फोन आया था। उसने बताया कि बरसात खत्म हो गई है रास्ते खुल गए हैं। सड़क भी नागलिंग से आगे तक चली गई है।



"आप आ जाओ, मैं भी आजकल खाली चल रहा हूं। दीदी मेरे लिए 7 नंबर का स्पोर्ट शू भी लेते आना।"
बड़े अपनेपन से अर्जुन ने कहा था।


गूगल अर्थ पर हिमालय को खोजने की सनक बेरोजगारी के दिनों से ही गुड्डी को लग गई थी। अपनी जेब खर्च का सारा पैसा साइबर कैफे में गूगल सर्च और ई-मेल करने में लगाने का चस्का उसके जीवन में एक नया शौक ले आया। हिमालय के दूरदराज गांव को देखने का, वहां की जिंदगी जीने का, वहां के लोगों सा बनने का। वेबसाइट पर बहुत सारे गांव के सुंदर सुंदर मनमोहक फोटो और लोगों की जिंदगी के क्रियाकलाप देख उसे अर्जुन का नंबर मिला था। वेबसाइट का नंबर लगने में भी एक दो साल लगे। जब एक दिन अचानक अर्जुन ने फोन उठाया तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा। अप्रैल महीने के अंत में उसके एग्जाम खत्म हो जाएंगे। तब वह निकल जाएगी अपने ड्रीम डेस्टिनेशन पर।
"मुझे दांतु तक जाना है" उसने फोन पर  पूछा था। 


"नहीं वहां तो अभी बंद रहता है, वहां जाने नहीं सकते हैं।"


फोन पर इस जवाब से वह खीझ गई। उसे लगा कि पैसे के कारण अर्जुन इंटरेस्ट नहीं ले रहा है। 
"भैया मैं अकेले थोड़ी आऊंगा मेरे दोस्त भी मेरे साथ होंगे।"


"आप जुलाई के बाद फोन करना" उधर से फोन कट गया।


फिर उसने गर्मियों की छुट्टियों भर कई बार फोन लगाया पर अर्जुन ने फोन नहीं उठाया। अगस्त महीने में अचानक एक दिन अर्जुन का फोन आया। उसने कहा कि अब आप दांतु की तरफ जाने के लिए तैयार हैं तो आ जाइए। 



गुड्डी को लगा कि अब जैसे कोई न्योता मिला हो जिसे ठुकराया नहीं जा सकता। और अर्जुन का क्या भरोसा दोबारा कब फोन उठाए। अगले दिन है अपना सामान बांधा और आनंद विहार बस अड्डे से बस पकड़कर पिथौरागढ़ और दार्चुला।


"अर्जुन जी मैं आज शाम की बस पकड़ कर कल दार्चुला पहुंच जाऊंगा, आप फोन ऑन रखना।" उसने फोन पर बताया।
"कितने लोग आ रहे हैं?" उसने पूछा। कई बार फोन पर बात करने के बाद गुड्डी के टॉमबॉय अंदाज़ से वो वाकिफ हो गया था।
"अकेले" उसने बताया और बात खत्म की।


"मम्मा मैं 8 10 दिन के लिए निकल रहा हूं, अर्जुन दार्चुला में ही मिलेगा" मां को फोन पर उसने बताया। 
"मैं अकेले ही जा रहा हूं, चिंता मत करना, शायद फोन भी ना लगे" पहाड़ की सुंदर छवि को सोचते हुए आंखों में खुशी भरते हुए उसने फोन काट दिया।


पिथौरागढ़ से दार्चुला पहुंचते हुए दोपहर बाद 4 बज गए। रास्ता तो ठीक था पर कई जगह सड़क बनने का काम लगे होने के कारण बस आराम आराम से ही चली। 


दार्चुला बस स्टैंड पर बस रुकने के बाद सबसे बाद में उतरने के लिए सीट छोड़ खड़ी होने लगी तो हाथ में छड़ी और सिर पर हैट लगाए पांच फुट ऊंचा अधेड़ उम्र का व्यक्ति अंदर बढ़ा।


"आप दिल्ली से?" उसने पूछा।


"अर्जुन जी" वह बोली। अर्जुन ने रकशैक खींच कर उठा लिया। गुड्डी ने पानी की बोतल और सामान का पैकेट उठाया और अर्जुन के पीछे पीछे चल पड़ी। रास्ते में अर्जुन ने पानी की बोतल, माचिस, मोमबत्ती और कछुआछाप का पैकेट खरीदवाया। दाल रोटी खिला कर अर्जुन ने गुड्डी को कमरे में भेज कर सुबह 7 बजे तैयार रहने को कहा और अपने लिए लाया हुआ पैकेट उठा कर निकल गया। कपड़े बदल कर फोन चार्जिंग में लगा कर गुड्डी भी सोने चली गई।
कल उसका दो साल का इंतजार खत्म होने वाला था।


वह तैयार हो चुकी थी। दरवाजा खोल कर बाहर आई तो देखा अर्जुन अपना सामान उठा कर सामने खड़ा था। 


"जल्दी कीजिए एक टैक्सी जाने वाली है। नाश्ता जम्बू में करेंगे। " वो बोला।


"कमरे का किराया ?" उसने अपना रकशैक उठाते हुए पूछा।


"वापिस आकर देंगे। अभी वो काम पर चला गया है" कहते हुए अर्जुन ने उसका बैग ले लिया और सीढ़ियों से उतर कर तेज कदमों से सड़क पर चलने लगा। 
"मैं अपना बैग खुद उठाउंगा" गुड्डी उसके पीछे चलने लगी। अर्जुन कहां सुनने वाला था। सड़क के मोड़ पर जीप खड़ी थी। वे बिना बात किए उसमें बैठ गये। 


चढ़ाई पर बढ़ती जीप और काली नदी के दोनों पार बसा, भारत और नेपाल की नदी सीमा से विभाजित होता और पुल से जुड़ा दार्चुला कितना सुंदर दिखता है। "जम्मू-कश्मीरा ड्यूटी मेरि" गीत के साथ आगे बढ़ने के बाद आगे कोई बड़ा कस्बा नहीं मिला।


नाश्ते में चा-बंद खाकर आगे बढ़े। अर्जुन ने उसे सीट बदलने को कहा और ड्राईवर के साथ वाली अगली सीट पर बैठने को कहा। तभी उपर के पाखे से फाल मारते हुए एक 12-14 साल का लड़का चलती जीप पर लटक गया। गुड्डी उसे देख कर ड्राइवर को देखते हुए फिर अर्जुन को देखने लगी। बाकी सवारियां अपने में मस्त। अर्जुन मुस्कुरा दिया और आंख बंद कर सोने की कोशिश करने लगा।


"भाई इसको अंदर बिठा लेते हैं।" ड्राईवर की ओर देख कर देख कर बोली।


कुछ दूर जाकर ड्राईवर ने चढ़ाई के बाद मोड़ पर जीप रोक दी। जीप की सीट फुल थीं। लड़का भी लटकते झूलते लहराया और उतर कर आगे आया।
"क्य हुवा रे?" वो बोला
जवाब की जगह ड्राईवर ने गुड्डी की तरफ देखा। गुड्डी ने दरवाजा खोला और उसे फ्रंट सीट पर अपने बाएं और बिठा लिया।


वो बैठ गया। उसकी आंखों में एक प्यारी सी मुस्कान और गुड्डी के चेहरे पर स्नेह व कुछ अच्छा करने के भावुक चमक।


"कहां जायेंगे साब।"? थोड़ी आगे पंहुचने पर गुड्डी बोली।
"नागलिंग"। वो बोला।


"मेरु नाम  रम्मू है, दूध छोड़ कर आया। रोज आता हूं" उसने बताया।


"स्कूल नहीं जाते क्या?"
"पांच पास हो गया हुं, अभी मां-बाबा बिमार हैं, इस साल छुट्टी फर हूं।" उसने बड़े गर्व और विश्वास से कहा।


सुन कर गुड्डी मन में खुश हुई पर चेहरे पर मुस्कान दबा न सकी और उसके कंधे को अपने पास खींच कर सराहने लगी। रास्ते में उसे एक अंजान पर अच्छा लगने वाला प्यारा साथी जो मिल गया।


गांव पंहुचने पर अर्जुन ने बताया कि दाल भात या मैगी खा कर जल्दी आगे बढ़ेंगे, आगे सड़क नहीं है। सामान उतार कर वे दुकान की ओर बढ़ने लगे।


"दीदी ड्राईवर को पांच सौ रुपए दे दो।" अर्जुन ने कहा। गुड्डी को ने पैसे अर्जुन को ही पकड़ा दिए। 


"दीदी खाणु  खाने हमारे मकान पर चलो।" रम्मू ने आग्रह किया। गुड्डी ने अर्जुन की तरफ देखा। अर्जुन ने  हामी भरी और बैग उठाया कर चल दिए। टेढ़े मेढे रास्ते, घर, दिवाल, गोर भैंसों, भेड़-बकरे, कटी फसल का ढेर, सूखते दाल, सब्जी, लकड़ी, घास पात के ढेर और अपने काम में मग्न घरों के महिला पुरुष व बच्चे।


गांव की खुशबू में गुड्डी खो गई, पता ही न लगा कब वे बहुत सारे घरों को पार कर रम्मू के घर पंहुच गए। मां बाबा ठीक ठाक लगे, बीमार नहीं, बस थोड़े उम्र से थके से।


उन्हें देखते ही रम्मू की मां ने बिना कुछ पूछे चटाई बिछाकर हाथ में पानी और गुड़ से उनका स्वागत किया। जैसे उनका ही इंतजार कर रही हो। अर्जुन भी बिना औपचारिकता के जूते उतार कर हाथ मुंह धोकर आसन पर बैठ गया। गुड्डी इधर उधर घूम कर फोटो खींचने लगी। वहां की भैंस, गाय और बकरी के छौने को घास पत्ते खिलाने में उसे मजा आने लगा।



रम्मू के बाबा ने छोटी छाकल, जग गिलास, ताजी खकड़ी और पिसे लूण रखने वाली लकड़ी की डिबिया  सामने रख दी। लहसुन, पुदीने और धनिया का  लूण और छांच पीकर और पहाड़ी खकड़ी की लंबी फांक खाकर उन्हें सुस्ताने का मन हुआ। रम्मू ने बताया कि उपर का भीतरि खोल वाले कमरे में आराम करो। घंटे भर बाद नींद खुली तो गरमागरम दाल भात, हैरि भुज्जी और दाल की चटनी तैयार थी। पेट भर खाने के बाद उसने अर्जुन की ओर देखा। अर्जुन मुस्कुरा दिया।
"कल सुबेर ही चलेंगे, आप घूम लीजिए।" 


अर्जुन ने जैसे उसके मन की बात कह दी। रम्मू की मां खेत जा रहीं हैं, गुड्डी और रम्मू भी साथ हो लिए। खेत के भीटों व मेंड़ की घास व झाड़ काटने का काम, चलते जानवरों को पानी पिलाने, हांककर घर लाने, छान में बांधने और रास्ते में पानी भर लाने का काम। यह सब देखकर गुड्डी को अपना कुछ खोया हुआ पाने का सा अहसास हो रहा था। उसके भीतर एक असीम सुख और अछूती भावनाएं उमड़ रही थी। 


चूल्हे की आग जलाने, खाना बनाने और एक साथ ज़मीन पर बैठकर खाना। वो भी घर पर बना घी, दही, दूध और कोदू की रोटी सब उसके सपनों के पूरे होने सा था।


"कल हम बालिंग दुगतु  दांतु चलेंगे" सोने जाते अर्जुन ने कहा। 
रम्मू बोला "मैं भी साथ चलूंगा"। 
रम्मू की मां ने बाबा की ओर देखा और फिर सब सहज हो गया।



सुबह मां बाबा को गले मिलकर गुड्डी ने मां की आंखों में नमी महसूस की वही नमी जो अपने घर से दिल्ली आते हर बार वो मां पिताजी की आंखों में देखती है पर जिसके प्रत्युत्तर में आज तक उसने कभी एक भी  आंसू नहीं छलकने दिया। 
"मैं फिर आऊंगा, आप उदास मत होना, आपका बड़ा बेटा हूं मैं" गुड्डी अपने टॉमबॉय अंदाज में फिर बोली।


सड़क से नीचे उतरते घुमावदार पगडंडी पर रम्मू चुपचाप आगे चलता हुआ सोच रहा है। 
"कैसी लड़की है ये"।


कोरोना वायरस (Corona Virus) दुनिया में 30 हजार लोगों की जान ले चुकी है...

संवाददाता : रायपुर छत्‍तीसगढ़


      कोरोना वायरस (Corona Virus) दुनिया में 30 हजार लोगों की जान ले चुकी है और 6 लाख से अधिक लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए हैं। कोरोना वायरस सबसे पहले गचीन में फैला और यहां अभी तक 81,439 लोग संक्रमित हुए हैं, जिनमें से 3,300 की मौत हो गई। हालांकि, चीन की ओर से दिए गए आंकड़ों पर दुनिया संदेह कर रही है। तो क्या चीन कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों की संख्या और मौत के असली आंकड़ों को छिपा रहा है? आइए जानते हैं किन वजहों से ऐसा माना जा रहा है|



दुनिया का ट्रेंड क्या है ?


यह बात सच है कि कोरोना संक्रमित मरीजों में से अधिकतर ठीक हो जाते हैं। अधिक खतरा उन्हीं लोगों को है जिन्हें पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं। हालांकि, इटली में चीन के मुकाबले तीन गुना से अधिक लोगों की जान गई है। इटली में 92,472 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं और 10 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। अमेरिका में संक्रमितों की संख्या 1 लाख से अधिक हो चुकी है। यहां भी 2 हजार लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अमेरिका में कोरोना संक्रमण चीन के मुकाबले काफी देरी से फैला है।


अस्थि कलश की मांग में तेजी


ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में चीन में अस्थिकलश की मांग बढ़ने के आधार पर मौत के आंकड़ों पर सवाल उठाया गया है। चीन की स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया गया है कि बड़ी संख्या में लोग शवदाह गृहों में राख लेने पहुंच रहे हैं। इसमें कहा गया है कि कोरना वायरस के केंद्र वुहान के एक शहगृह में पिछले दो दिनों में 5 हजार अस्थि कलश मंगाए गए हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि कोरोना से 3300 लोगों की जान गई है तो अस्थि कलश की मांग में उछाल क्यों आया है?


चीन में क्यों बंद हुए 2 करोड़ से अधिक फोन ?


चीन की मोबाइल कंपनियों के मुताबिक, पिछले 2-3 महीनों में 2 करोड़ से अधिक मोबाइल फोन डिएक्टिवेट हो गए हैं। यह पहली बार है जब चीन में इस तरह टेलीफोन यूजर्स की संख्या तेजी से घटी है। ऐसे में सवाल उठता है कि वे कौन लोग हैं जिनके फोन बंद हुए हैं और क्यों? इसके पीछे एक तर्क तो यह दिया जा रहा है कि कोरोना वायरस की वजह से जो प्रवासी मजदूर शहरों को छोड़कर गांव चले गए, उन्होंने अपने शहर वाले नंबर को यूज करना बंद कर दिया। हालांकि, चीन में अब कंपनियों में काम शुरू हो गया है। ऐसे में यदि इस तर्क के पीछे सच्चाई है तो अगले कुछ दिनों में ये फोन दोबारा चालू हो जाएंगे, यदि ऐसा नहीं होता है तो माना जाएगा कि दाल में कुछ काला जरूर है।


इसलिए भी संदेह


असल में चीन की मीडिया स्वतंत्र नहीं है। वहां से वही खबरें दुनिया के सामने आती हैं, जिन्हें चीन की सरकार बाहर आने देती है। चीन ने शुरुआत में कोरोना वायरस की खबरों को भी दबाना चाहा। उसने उन डॉक्टरों को भी प्रताड़ित किया, जिन्होंने सबसे पहले इस वायरस की पहचान की और सरकार को सतर्क किया। सवाल तो वायरस की उत्पत्ति को लेकर भी उठे। संदेह यह भी जाहिर किया गया कि चीन किसी जैविक हथियार की खोज में तो नहीं जुटा था? हालांकि, अभी इन बातों पर पक्के तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता है। समय के साथ कई सवालों से पर्दा उठ सकता है।


मुख्यमंत्री को कृषि मंत्री ने दूसरे प्रदेशों में फंसे झारखंड के लगभग 3700 लोगों की सूची सौंपी...

संवाददाता : रांची झारखंड


      मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कृषि पशुपालन और सहकारिता मंत्री बादल ने मुलाकात की l कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री को लगभग 3700 लोगों की विस्तृत सूची सौंपी जो लॉक डाउन की वजह से दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं l इनमें से ज्यादातर लोग मजदूर हैं l अब इन लोगों को  भोजन समेत अन्य जरूरी सामान नहीं पहुंच पा रहा है l मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉक डाउन होने की वजह से इन्हें वापस लाने में काफी दिक्कतें हैं l


उन्हें सभी जरूरी और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार उन राज्यों की सरकारों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं l मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इसके लिए वरीय अधिकारियों की जवाबदेही और जिम्मेदारी तय कर दी है l उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे बाहर फंसे लोगों की मिली सूचनाओं पर उन्हें त्वरित रूप से राहत देने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएं l



राज्य के अंदर और दूसरे प्रदेशों में फंसे लोगों को राहत देने के लिए उठाए जा रहे हैं  कदम


मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के बीच लॉक डाउन की वजह से राज्य के अंदर और दूसरे प्रदेशों में फंसे झारखंड के लोगो को हो रही परेशानियों पर भी चर्चा हुई l लोगों को कैसे और किस तरह राहत और उनकी मूलभूत जरूरतों को उपलब्ध कराया जाए,  इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस दिशा में सभी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है l लोगों को लॉक डाउन की वजह  से समस्या  नहीं हो ,इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है और खुद इसकी मॉनिटरिंग भी कर रहा हूं l


पशु चारे की किल्लत को लेकर भी मुख्यमंत्री को कराया  अवगत


कृषि मंत्री ने  लॉक डाउन की वजह से राज्य में पशु चारा की घोर किल्लत से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया l उन्होंने कहा कि पशु चारा नहीं होने से पशुओं की जान पर आफत आ गई है lअतः पशु चारा की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर आवश्यक कदम उठाया जाए l मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले को लेकर  बहुत जल्द अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करेंगे l


वेज फेड के माध्यम से सरकारी दर पर फलों और सब्जियों की होगी बिक्री


मुख्यमंत्री ने कृषि मंत्री के इस विचार पर अपनी सहमति जताई कि  वेज फेड के माध्यम से सरकारी दर पर और सब्जियों की बिक्री सुनिश्चित की जाए l मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के बीच  दुग्ध उत्पादकों से दूध की खरीदारी की व्यवस्था पर भी विस्तृत चर्चा हुई l मुख्यमंत्री ने कहा कि दुग्ध उत्पादकों को किसी तरह का नुकसान नहीं हो और ना ही दूध की बर्बादी हो, इस दिशा में सरकार गंभीर हैl


कोरोना वायरस से निपटने को लेकर  विचार विमर्श


मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री के बीच कोरोना वायरस के तीसरे स्टेज में आने की स्थिति में इससे निपटारे के लिए क्या व्यवस्था होनी चाहिए , इस पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ l मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी सरकारी अस्पतालों के साथ वेंटीलेशन की सुविधा वाले निजी अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे l साथ ही सभी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड में सारी तैयारियां पूरी कर लेने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए है l


पुणे में फंसे एक युवक को दुमका लाने के लिए सरकार व्यवस्था करेगी


कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री को बताया कि दुमका का एक युवक पुणे में फंसा हुआ है l उसकी मां का देहांत हो चुका है , लेकिन लॉक डाउन होने की वजह से वह वापस नहीं आ पा रहा है l मुख्यमंत्री है कहा कि युवक को पुणे से दुमका  वापस लाने के लिए राज्य सरकार की ओर से व्यवस्था की जाएगी l  


लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रवासी श्रमिकों के लिए जिलों में सेफ कैंप बनाकर ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाए...

संवाददाता चंडीगढ़ हरियाणा 


       हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सभी जिला प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि लॉकडाउन अवधि के दौरान प्रवासी श्रमिकों के लिए जिलों में सेफ कैंप बनाकर, इन श्रमिकों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही, सेफ कैंपों में इन सभी श्रमिकों के स्वास्थ्य की जांच की जाए ताकि यदि कोई भी व्यक्ति अगर कोरोना के संक्रमण की चपेट में आया हो, उसकी समय रहते जांच हो सके और उसे क्वारंटाइन किया जा सके।


मुख्यमंत्री ने यह निर्देश यहां वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संकट समन्वय समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए।



मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे श्रमिकों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखें और ऐसे श्रमिकों को यह समझाया जाए कि वे सेफ कैंपों में रहें और इन्हें खाना, चिकित्सा व अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि राज्य में कार्य करने वाले अधिक से अधिक श्रमिकों को इन सेफ कैंपों में रखा जाए। इसके अलावा, विशेष चिकित्सा शिविर लगाकर इन श्रमिकों को चिकित्सा परीक्षण की सुविधा दी जाए, ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण की श्रंखला को फैलने से रोका जा सके। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि अधिकारी अपने-अपने जिलों में और जिले की सीमाओं पर नाकाबंदी करके इन श्रमिकों को आगे बढऩे से रोका जाए और इन्हें सेफ कैंपों में रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।


मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अधिकारी अपने-अपने जिलों में उद्योगपतियों से अनुरोध करें कि वे उनके कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले श्रमिकों के रहने और भोजन की व्यवस्था करें और श्रमिकों को किसी भी हाल में जाने के लिए न कहा जाए।


मुख्यमंत्री ने गरीब लोगों के लिए चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जो लाभार्थी मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना और निर्माण श्रमिक बोर्ड सूची में शामिल नहीं हैं, ऐसे लोगों के पंजीकरण के कार्य में तेजी लाई जाए ताकि इन लोगों को 1,000 रुपये प्रति सप्ताह की वित्तीय सहायता दी जा सके। इसके साथ ही, इन लोगों को सभी बुनियादी आवश्यकताएं भी मुहैया करवाने पर जोर दिया जाए।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू रूप से चलाने के लिए स्वयंसेवकों, सामाजिक संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों की अधिकतम भागीदारी को सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की घर द्वार पर आपूर्ति के लिए प्रत्येक जिले में मोबाइल वैन की भी उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।


मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि चूंकि कुरुक्षेत्र एक धार्मिक नगरी है और कई संत और साधु पहले से ही वहां रह रहे हैं, इसलिए उनके लिए उचित व्यवस्था की जानी चाहिए और उनके रहने और भोजन की पूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में कई सामाजिक संगठन भी काम कर रहे हैं, इसलिए उनसे समन्वय स्थापित करके भोजन और रहने की सुविधाओं को सुनिश्चित करने में इनकी भागीदारी बढ़ाई जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में राशन की दुकानें खुली हैं, यह अच्छी बात है, परंतु बाजारों में भीड़ को कम रखने के लिए और सोशल डिस्टेंसिंग के मानदंडो का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए प्रत्येक जिले में दुकानें खोलने के बजाय, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करके घर द्वार पर वितरण की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों से आने वाली सब्जियों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही भी सुनिश्चित की जाए।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने जिलों में विदेश से आए लोगों पर कड़ी निगरानी रखें और उनके स्वास्थ्य की जानकारी भी लगातार लेते रहें ताकि वायरस की श्रृंखला को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में कोविड- 19 के लिए आवश्यक वेंटिलेटर और अन्य आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।


प्रदेश में 300 पौध संरक्षण केंद्र खुले रहेंगेः मुख्यमंत्री

संवाददाता : शिमला हिमाचल


      मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि किसानों और बागवानों को पौध संरक्षण सामग्री जैसे स्प्रे तेल, फफूंदनाशक और उर्वरक आदि प्रदान करने के लिए प्रदेश में 300 पौध संरक्षण केंद्र खुले रहेंगे। मुख्यमंत्री ने आज यहां वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक बैठक के दौरान यह जानकारी दी।



उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि किसानों की सुविधा के लिए पौध संरक्षण सामग्री की बिक्री करने वाली दुकानें खुली रहेंगी। इसके अतिरिक्त मधुमक्खी पालन से जुड़े लोगों की सुविधा के लिए भी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आगामी सेब सीजन को ध्यान में रखते हुए पड़ोसी राज्यों से मधुमक्खी बक्सों के परिवहन के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सेब और सब्जियों के लिए किसानों को एंटी हेलनेट उपलब्ध करवाए जाएंगे।


मुख्य सचेतक नरेन्द्र बरागटा ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि बागवानों की सुविधा के लिए उर्वरकों और स्प्रे तेल की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित बनाई जाए। उन्होंने कहा कि सेब बागीचों के लिए इन दिनों उर्वरकों की आवश्यकता है, इसलिए ऊपरी शिमला के लिए इन सामग्रियांे की आपूर्ति करने वाले वाहनों की आवाजाही प्रतिबन्धित न की जाए। उन्होंने कहा कि एंटी हेलगन में इस्तेमाल होने वाले सिलेंडरों की आपूर्ति करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई।


मुख्य सचिव अनिल खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव मनोज कुमार एवं आरडी धीमान, पुलिस महानिदेशक एसआर मरडी, प्रधान सचिव जेसी शर्मा और सचिव देवेश कुमार भी बैठक में उपस्थित थे।


लॉकडाउन में मुख्यमंत्री का ‘लोकवाणी‘ कार्यक्रम का प्रसारण नहीं होगा...

संवाददाता : रायपुर छत्‍तीसगढ़


      कोरोना संक्रमण के वैश्विक संकट के कारण आकाशवाणी, रायपुर भी पूर्णतः लॉकडाउन  में है। अतः अप्रैल 2020 के दूसरे रविवार को ‘लोकवाणी‘ (मुख्य मंत्री भूपेश बघेल की बात-आपके साथ) का प्रसारण नहीं हो सकेगा। परिस्थितियों के अनुरूप मुख्यमंत्री अपने निवास से ही जनता के नाम संदेशों की रिकार्डिंग करवा रहे हैं, जिसका विभिन्न उपलब्ध माध्यमों से प्रदेशव्यापी प्रसारण कराया जा रहा है।



कोरोना पीड़ितों की मदद में जुटे चिकित्साकर्मी स्वयं भी सुरक्षित रहें : मुख्यमंत्री

संवाददाता  : जयपुर राजस्थान


      मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोविड-19 महामारी पूरे विश्व के सामने एक चुनौती है और हमारा लक्ष्य है कि राजस्थान इससे निपटने के लिए दुनिया में सबसे बेहतर काम करे। उन्होंने प्रदेश के सभी डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों को धन्यवाद दिया कि वे पूरे जी-जान से कोरोना के संक्रमण से प्रभावित लोगों की पहचान करने और उनका इलाज करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना पीड़ितों की मदद के क्रम में सभी चिकित्साकर्मी स्वयं भी सुरक्षित रहें। 

 

गहलोत ने शनिवार को मुख्यमंत्री निवास से जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) और विशेषज्ञों डॉक्टरों के सलाहकार दल के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि कोरोना पीड़ितों का सही समय पर इलाज और बचाव के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों की पूरी तरह से पालना करके ही इस जंग को जीता जा सकेगा। उन्होंने लगातार काम कर रहे चिकित्सकों तथा अन्य कर्मियों को नियमित अंतराल पर विश्राम देने के भी निर्देश दिए।  



 

मुख्यमंत्री ने कहा कि भीलवाड़ा जिले तथा जयपुर के रामगंज क्षेत्र में संक्रमण की स्थिति पर संबंधित सीएमएचओ से विस्तृत जानकारी ली और कहा कि ये क्षेत्र पूरे देश के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। इसलिए यहां काम कर रहे चिकित्साकर्मियों की जिम्मेदारी अधिक बढ़ जाती है कि वे सभी संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों की पहचान करें और उन्हें समुचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएं।  

 

गहलोत ने प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में कोविड-19 से निपटने के लिए की गई तैयारियों, उपलब्ध संसाधनों, आईसोलेशन बेड तथा जांच केन्द्रों की स्थिति पर भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमें भविष्य में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा, जिसके लिए राज्य सरकार सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि अभी तक कोरोना संक्रमण सामुदायिक स्तर पर नहीं फैला है, लेकिन हमें इससे निपटने में कोई कसर नहीं रखते हुए जिला अस्पतालों तथा सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तक डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण और संसाधन देने की व्यवस्था करनी चाहिए। 

 

विशेषज्ञों डॉक्टरों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ फील्ड में जुटे चिकित्साकर्मियों के लिए आवश्यक उपकरण एवं नियमित रूप से अवकाश आदि की व्यवस्था कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही, अस्पतालों को इस संक्रमण के फैलाव के केन्द्र बनने से रोकने के लिए विशेष दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए। उन्होंने जांच किट और जीवन रक्षक उपकरणों सहित सभी चिकित्सकीय संसाधनों का समुचित इस्तेमाल करने के लिए भी कई सुझाव दिए। विशेषज्ञों ने कहा कि अन्य बीमारियों से ग्रसित मरीजों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए इसका इलाज अलग अस्पतालों में किया जाना चाहिए।  

 

वीडियो कॉन्फ्रेंस में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर राजाबाबू पंवार, सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी, सवाई मानसिंह अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. वीरेंद्र सिंह, प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य, जिला कलक्टर एवं अन्य विशेषज्ञ चिकित्सक उपस्थित थे। 

राजभवन भी गरीबों को प्रतिदिन उपलब्ध करवा रहा भोजन...

 


      राज्यपाल लालजी टंडन के निर्देश पर राजभवन द्वारा लॉक डाउन के दौरान गरीबों को नगर निगम के माध्यम से भोजन वितरण किया जा रहा है। राजभवन में इस पुण्य कार्य के लिये प्रतिदिन भोजन के 100 पैकेट तैयार कराए जा रहे हैं।



राज्यपाल ने सभी मोहल्ला और उत्सव समिति के अध्यक्षों से अपील है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में समाज के वंचित वर्ग की सहायता करें। उन्होंने आग्रह किया है कि समर्थ लोग आर्थिक रूप से और भोजन, दवाई आदि प्रदाय में सहयोग करें।


उन्होंने कहा कि इस सेवाभावी कार्य से देश और समाज के प्रति वे अपना कर्तव्य पूरा करेंगे। साथ ही, संकट की इस घड़ी में योगदान देने की आत्म-संतुष्टि भी प्राप्त करेंगे।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आयुष चिकित्सकों के साथ विचार-विमर्श किया...

संवाददाता : नई दिल्ली


      प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयुष सेक्‍टर के चिकित्सकों के साथ विचार-विमर्श किया।प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष सेक्‍टर में राष्ट्र को स्वस्थ रखने की एक लंबी परंपरा रही है और ‘कोविड-19’ से निपटने के लिए निरंतर जारी ठोस प्रयासों में इसका विशेष महत्व कई गुना बढ़ गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष चिकित्सकों का नेटवर्क पूरे देश में फैला हुआ है, अत: उनके लिए यह अत्‍यंत आवश्यक है कि वे डब्ल्यूएचओ के दिशा-निर्देशों के अनुसार काम करते हुए उन अच्छी प्रथाओं या तौर-तरीकों पर अमल करने के संदेश को फैलाने के लिए इस नेटवर्क का उपयोग करें जिन्हें वायरस को फैलने से रोकने के लिए किए जा रहे प्रयासों में अपनाने की नितांत आवश्यकता है। उन्होंने इस कठिन समय में दिमाग को तनाव मुक्त करने और शरीर को सुदृढ़ बनाने हेतु #YogaAtHome को बढ़ावा देने के लिए आयुष मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।


प्रधानमंत्री ने यह बात रेखांकित की कि आयुष में इस बीमारी का इलाज होने के अप्रमाणित दावों को परखने और इसकी तथ्य-जांच अत्‍यंत आवश्‍यक है। उन्‍होंने कहा कि आयुष वैज्ञानिकों, आईसीएमआर, सीएसआईआर और अन्य अनुसंधान संगठनों को साक्ष्‍य आधारित शोध के लिए निश्चित तौर पर एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को इस चुनौती से पार पाने के लिए समस्‍त स्वास्थ्य कार्यबल का उपयोग करने के लिए अवश्‍य ही तैयार रहना चाहिए, और यदि जरूरत पड़े तो सरकार आयुष से जुड़े निजी डॉक्टरों से मदद देने का अनुरोध कर सकती है।



प्रधानमंत्री ने यह सुझाव दिया कि आयुष दवा निर्माता अपने संसाधनों का उपयोग सैनिटाइजर जैसी आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन में कर सकते हैं जिनकी भारी मांग इन दिनों है। प्रधानमंत्री ने इस महामारी से लड़ने के लिए उनसे जनता तक पहुंचने और निरंतर जागरूकता उत्पन्न करने के लिए टेलीमेडिसिन के प्‍लेटफॉर्म का उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने महामारी को फैलने से रोकने के लिए पूरे उत्‍साह के साथ सामाजिक दूरी बनाए रखने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।


आयुष चिकित्सकों ने कोविड-19 के खिलाफ देश की लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए प्रधानमंत्री की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए इन पारंपरिक प्रथाओं या तौर-तरीकों के प्रभाव के बारे में चर्चा की। उन्होंने रोग के लक्षणों के अनुसार उपचार के लिए अनुसंधान करने संबंधी अपने प्रयासों का भी उल्लेख किया और इसके साथ ही संकट के इस समय में राष्ट्र की सेवा करने की इच्छा व्यक्त की।


प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्‍व भर में भारत की पारंपरिक दवाओं और चिकित्सा पद्धतियों के बारे में जागरूकता उत्‍पन्‍न करना अत्‍यंत आवश्‍यक है। उन्होंने जन सेवा के लिए निरंतर प्रयास करने के लिए आयुष चिकित्सकों का धन्यवाद किया और इसके साथ ही ‘कोविड-19’ के खिलाफ भारत की लड़ाई में इनके द्वारा निभाई जाने वाली महत्वपूर्ण भूमिका पर फिर से प्रकाश डाला।


केंद्रीय आयुष मंत्री, कैबिनेट सचिव और आयुष मंत्रालय में सचिव ने भी इस विचार-विमर्श में भाग लिया।