मंगलवार, 5 मई 2020

"ज़मी पर लाये वो मुझे" कवयित्री नम्रता (अश्विनसुधा) की कलम से...

कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता नम्रता "अश्विनसुधा" की कलम से :-


 


"ज़मी पर लाये वो मुझे"


ज़मी पर लाये वो मुझे,
और अब ख़ुद हीं चल दिये,
किसी और सफ़र की ओर...
और मैं,
उनके अक्स को ख़ुद में समेटे,
उस राह पर चली जा रही हूँ...
जहाँ, मंज़िल भी है और राहें भी,
पर अफ़सोस....
कि थामने वाले वो हाथ नहीं
बावज़ूद इसके यकीं हैं मुझे
नज़रें उनकी अब भी हैं यहीँ कहीं
मेरे इर्द-गिर्द , मेरे आस-पास l


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