गुरुवार, 9 जुलाई 2020

लॉकडाउन में जरूरतमंदों की सेवा करने वालों से पीएम मोदी ने किया संवाद...

संवाददाता : नई दिल्ली


      लॉकडाउन के दौरान वाराणसी में जरूरतमंदों की मदद करने वालों से गुरुवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए संवाद किया। इस दौरान उन्होंने वाराणसी स्थित गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सावन का महीना है, ऐसे में वाराणसी के लोगों के साथ संवाद करना मतलब भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने जैसा लगता है।


यह भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद है कि कोरोना वायरस संकट के दौरान भी हमारा वाराणसी उत्साह से भरा है।उन सभी ने जो इस कोरोना वायरस महामारी संकट के दौरान काम किया, ऐसा नहीं है कि उन्होंने केवल अपनी जिम्मेदारियों को निभाया। एक आशंका थी, ऐसी स्थिति में स्वेच्छा से आगे आना, यह सेवा का एक नया रूप है। उन्होंने आगे कहा कि मुझे बताया गया है कि जब जिला प्रशासन के पास भोजन बांटने के लिए अपनी गाड़ियां कम पड़ गईं तो डाक विभाग ने खाली पड़ी अपनी पोस्टल वैन इस काम में लगा दीं।



सोचिए, सरकारों की, प्रशासन की छवि तो यही रही है कि पहले हर काम को मना किया जाता है।पीएम ने बताया कि आज भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है। इसका बहुत बड़ा लाभ बनारस के भी गरीबों, श्रमिकों को हो रहा है। आप कल्पना कर सकते हैं कि भारत, अमेरिका से भी दोगुनी आबादी से, एक पैसा लिए बिना उनका भरण-पोषण कर रहा है। आज उत्तर प्रदेश ने न सिर्फ संक्रमण की गति को काबू में किया हुआ है बल्कि जिन्हें कोरोना हुआ है, वो भी तेजी से ठीक हो रहे हैं। इसकी बहुत बड़ी वजह आप सभी लोग हैं। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ भारत पर सवाल उठा रहे थे।


वो कह रहे थे कि इस बार भी स्थिति खराब हो जाएगी लेकिन क्या हुआ? 23-24 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश ने अपने लोगों के साथ मिलकर इन सभी आशंकाओं पर काबू पा लिया।उत्तर प्रदेश के समान जनसंख्या वाले ब्राजील जैसे विशाल देश में कोरोना वायरस के कारण लगभग 65,000 लोगों की मौत हुई है। जबकि उत्तर प्रदेश में, लगभग 800 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, इसका मतलब है कि राज्य में कई लोगों की जान बचाई गई है। 100 साल पहले, एक ऐसी ही महामारी हुई थी, यह कहा जाता है कि तब भारत में जनसंख्या इतनी बड़ी नहीं थी। फिर भी, उस समय, भारत उन देशों में से एक था, जिसमें सबसे ज्यादा मौतें हुई थीं। इसीलिए इस समय पूरी दुनिया भारत के लिए चिंतित थी।


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